संसद में गतिरोध से प्रधानमंत्री दुखी, जेपीसी से इंकार (लीड-2)

एयर इंडिया के विशेष विमान से, 11 दिसम्बर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले से सम्बंधित कथित घोटाले की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराने की विपक्ष की मांग को खारिज करते हुए शनिवार को कहा कि मौजूदा तंत्र इस मामले की जांच में सक्षम है।

विपक्ष की जेपीसी की मांग के कारण संसद में जारी गतिरोध पर पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह इस गतिरोध से 'बहुत दुखी' हैं।

यूरोप भ्रमण के दौरान अपने साथ यात्रा कर रहे संवाददाताओं से प्रधानमंत्री ने कहा, "यह बहुत ही दुखद है कि संसद में कामकाज नहीं हो रहा है।"

यह औपचारिक संवाददाता सम्मेलन तो नहीं था, फिर भी प्रधानमंत्री ब्रसेल्स से बर्लिन जाते समय विशेष विमान में संवाददाताओं से मिले। इसी दौरान उनसे 2जी एस्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिए जेपीसी के गठन की विपक्ष मांग को लेकर संसद में जारी गतिरोध के बारे में पूछा गया।

मनमोहन सिंह ने कहा, "मैंने विपक्ष से बार-बार कहा है कि मौजूदा संस्थानिक तंत्र वही कर सकता है जो जेपीसी कर सकती है।"

विपक्ष की मांग को सरकार द्वारा खारिज किए जाने से उत्पन्न विवाद के कारण समूचा शीतकालीन सत्र बेकार चला गया, क्योंकि प्रतिदिन विरोध प्रदर्शन के बाद संसद की कार्यवाही स्थगित होती रही है।

यह पूछे जाने पर कि इस मुद्दे में अपनी संलिप्तता पर वह कब चुप्पी तोड़ेंगे, प्रधानमंत्री ने कहा, "समय आने पर।"

ज्ञात हो कि नौ नवम्बर को शुरू हुए संसद के शीतकालीन सत्र की कार्यवाही 2जी स्पेक्ट्रम मामले की जांच जेपीसी से कराने की विपक्ष की मांग को लेकर लगातार स्थगित होती रही है। कहा गया है कि इस घोटाले से सरकारी खजाने को भारी क्षति हुई है। सत्र का समापन सोमवार को होने जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने संसद की कार्यवाही बिना कामकाज के लगातार स्थगित होने पर चिंता जताई।

यह पूछने पर कि विपक्ष ने यदि अगले वर्ष बजट सत्र के दौरान भी विरोध प्रदर्शन जारी रखा, जैसा कि उसने चेतावनी दी है, तब क्या होगा, प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं संसदीय प्रणाली के भविष्य को लेकर चिंतित हूं। मैं उम्मीद करता हूं कि विपक्ष विवेक से काम लेगा।"

यह पूछने पर कि जब देश समस्याओं से जूझ रहा है, ऐसे में विदेश यात्रा क्या आवश्यक था, मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत यदि वैश्विक मुद्दों के प्रति गंभीर है तो उसे पहले से किए अंतर्राष्ट्रीय वादे निभाने ही होंगे।

उन्होंने कहा, "यह पूर्व निर्धारित कार्यक्रम था। यह बहुत पहले ही तय हो चुका था। वादे निभाने होंगे, वरना हमें कौन गंभीरता से लेगा?"

सिंह ने कहा, "संसद में जो कुछ रहा है, अच्छा नहीं हो रहा है।"

प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा उनके प्रति यह कहने के अगले दिन आई है कि 'शासन करने की इच्छा खो चुके हैं।'

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने शुक्रवार को कहा था, "लोकतंत्र में प्रधानमंत्री सर्वोपरि होता है। वह संसद या उसके बाहर राष्ट्रीय बहस से अनुपस्थित नहीं हो सकता है, खासकर तब जब समूचा देश सच जानने को उत्सुक है। देश के गंभीर मसलों पर प्रधानमंत्री को ऐसा नहीं प्रदर्शित करना चाहिए जैसे कि उन्हें शासन करने की इच्छा न हो।"

प्रधानमंत्री शुक्रवार को भारत-यूरोपीय संघ में भाग लेने के लिए ब्रसेल्स में थे। वह रविवार की सुबह स्वदेश लौटेंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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