संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में जलवायु समझौते पर सहमति
समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक समझौते को मंजूरी मैक्सिको के कानकुन में हुए संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन में दी गई। सम्मेलन में गर्मी से जूझने वाले निर्धन देशों की मदद के लिए राहत पैकेज देने पर भी सहमति बनी। यह सम्मेलन कोपेनहेगन में हुए संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के विफल होने के एक वर्ष बाद आयोजित हुआ है।
मेक्सिको के राष्ट्रपति फिलिप काल्डेरोन ने समझौते पर सहमति के बाद जनसमूह से कहा, "विश्वास लौटा है। उम्मीद लौट आई है।" उन्होंने कहा कि कानकुन सम्मेलन 'जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में सहयोग के नए युग' का परिचायक है।
बोलिविया की भारी आपत्ति के बीच समझौता मंजूर किया गया। बोलिविया का कहना है कि समझौता ग्लोबल वार्मिग का सामना करने के लिहाज से कमजोर है। उसका कहना है कि करारनामे की स्वीकृति संयुक्त राष्ट्र के उस नियम के उल्लंघन का द्योतक है, जिसके तहत समझौते पर सम्मेलन के सभी 194 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है।
बोलिविया के प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख पाब्लो सैलोन ने कहा, "हमने स्पष्ट रूप से अपनी बात कही और अब भी उसे दोहराते हैं कि हम इस फैसले के विरोध में हैं। हम महसूस करते हैं कि स्वीकृति के लिए आमराय नहीं ली गई।"
सम्मेलन की अध्यक्षता करने वाली मेक्सिको की विदेश मंत्री पैक्ट्रिसिया एस्पिनोसा ने बोलिविया की दलील को दरकिनार करते हुए समझौते को स्वीकृत किया। लेकिन जो खुशी का माहौल होना चाहिए, वह इस कारण नहीं बन सका, क्योंकि बोलिविया की आपत्ति ने सभी देशों की सरकारों के बीच सहमति बनाने के लिए लगभग दो हफ्ते तक की गई कड़ी मशक्कत को नकार दिया।
समझौते में क्योटो प्रोटोकॉल के भविष्य पर बड़े मतभेदों को ध्यान में रखते हुए मध्यमार्ग अपनाया गया। साथ ही मुद्दा रखा गया कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से कैसे निबटा जाए। इस मुद्दे को नहीं उठाने पर समूचे सम्मेलन के पटरी से उतरने की आशंका थी।
इसके अलावा हरित जलवायु कोष का गठन भी किया गया तथा ग्लोबल वार्मिग के प्रभाव से बचने में देशों की मदद के लिए नया तंत्र विकसित करने, वन-कटाई रोकने एवं तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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