..तो अगली पीढ़ी के लिए नहीं होंगे किले और महल
उनका यह नया विरासत संग्रह 'फोर्ट्स एंड पैलसेज ऑफ इंडिया' देश के 5,000 वर्षो के पुरातात्विक धरोहर को दर्शाता है।
बेग ने आईएएनएस को बताया, "मैंने इस किताब पर 25 वर्ष पहले काम करना शुरू किया। भारतीय विरासत को संरक्षित और उसे बढ़ावा देने के लिए यह मेरे जीवन भर के प्रयासों का फल है।"
इस किताब का प्रकाशन 'ओम बुक्स इंटरनेशनल' ने किया है। इस सचित्र किताब का विमोचन नई दिल्ली में शुक्रवार को नवाब ऑफ पटौदी मंसूर अली खान और उनकी पत्नी शार्मिला टैगोर ने किया।
पिछले 25 वर्षो से देश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध और संरक्षणवादी अभियानों की अगवानी करने वालीं बेग ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए नए तरीकों को प्रोत्साहित कर रही हैं।
'इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज' (आईएनटीएसीएच) में वास्तुकला धरोहर विभाग की महानिदेशक रह चुकी बेग अब 'वर्ल्ड मॉनूमेंट्स फंड' में सलाहकार हैं।
बेग ने कहा, "भारत में हजारों किले हैं। केवल महाराष्ट्र में इनकी संख्या 1,300 है। मैंने इनमें से थोड़े हिस्से को लिया है। प्रत्येक किले पर एक किताब प्रकाशित की जा सकती है।"
यह पूछे जाने पर कि उनका पसंदीदा किला कौन सा है, इस पर उन्होंने कहा, "केरल में मिट्टी और लकड़ी से निर्मित पदमनाभापुरम पैलेस फोर्ट उन्हें बेहद पसंद है।"
उन्होंने कहा, " वर्तमान समय में इन किलों का अस्तित्व खतरे में है। यदि इन्हें संरक्षित करने के उपाय नहीं किए गए तो ये शानदार किले और महल अगली पीढ़ी के लिए अपने अस्तित्व में नहीं होंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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