नेपाली माओवादियों के निशाने पर फिर एक भारतीय कम्पनी
नेपाल सरकार ने एक भारतीय इंजीनियर और एक नेपाली नागरिक द्वारा स्थापित कम्पनी ग्रीन वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड को नेपाल के दो जिलों ओखलधुंगा और रामछाप में एक पनबिजली परियोजना के लिए सर्वे करने का लाइसेंस जारी किया था।
ये दोनों जिले पहले माओवादी विद्रोहियों का गढ़ और सर्वाधिक हिंसा प्रभावित रहे हैं।
सरकार इस कम्पनी के साथ इस परियोजना पर आगे बढ़ने के लिए एक नया समझौता करने वाली है।
इसके ठीक एक दिन पहले शनिवार को नेपाली संसद में माओवादियों की सबसे बड़ी पार्टी की रामछाप इकाई ने कम्पनी के सामने छह मांग रखते हुए धमकी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो कम्पनी को काम नहीं करने दिया जाएगा।
मांग पत्र पर कुशल नाम के एक व्यक्ति का हस्ताक्षर है, जिसने खुद को माओवादियों की जिला समिति का सचिव बताया है। उसने कहा है कि परियोजना प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय लोगों के अधिकारों के खिलाफ है।
परियोजना का पांच फीसदी शेयर स्थानीय लोगों को मुफ्त देने की मांग रखी गई है और अन्य 20 फीसदी हिस्सेदारी स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षित रखने की मांग की गई है।
कम्पनी से मांग की गई है कि परियोजना से पैदा होने वाली बिजली सबसे पहले इस जिले को कम से कम भाव पर दी जाए। बची हुई बिजली ही बाहर भेजी जाए।
माओवादियों ने स्थानीय लोगों के लिए नौकरी, शिक्षा, परिवहन, पेयजल आपूर्ति और सिंचाई क्षेत्र में आधारभूत सुविधा देने की मांग की है।
गौरतलब है कि पिछले महीने भी माओवादियों ने पनबिजली परियोजनाओं की एक हिट लिस्ट जारी की थी, जिसमें करीब दर्जन भर कम्पनियां या तो भारतीय हैं या भारतीयों की सझीदारी वाली हैं।
माओवादियों की यह धमकी नेपाल की माओवादी पार्टी के दोयम व्यवहार की ओर इशारा करती है। कई भारतीय कम्पनियों को नेपाल की मिलीजुली सरकार ने लाइसेंस जारी किया था, जिसमें माओवादी सबसे बड़ी पार्टी की हैसियत से थे, जबकि कुछ को खुद उनके नेता पुष्प कमल दहाल प्रचंड के प्रधानमंत्रित्व काल में लाइसेंस जारी किया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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