जन्नत में नहीं होती कठपुतलियों की तारीफ : भरूचा

नई दिल्ली, 11 दिसम्बर (आईएएनएस)। अब तक आठ किताबें लिख चुके रुजबेह एन. भरूचा स्वतंत्रता की शक्ति में यकीन करते हैं। वह कहते हैं कि शरीर और आत्मा की दो समानांतर दुनिया होती हैं और जन्नत में कठपुतलियों को पसंद नहीं किया जाता।

अपनी किताब के प्रचार के सिलसिले में दिल्ली आए भरूचा ने आईएएनएस को बताया, "सब कुछ रोका नहीं जा सकता या कैद में नहीं रखा जा सकता। स्वर्ग में कठपुतलियों को पसंद नहीं किया जाता।" मुम्बई में रहने वाले भरूचा की नई किताब 'फकीर: द जर्नी कन्टीन्यूज' है।

यह किताब भरूचा की आध्यात्मिक विचारधारा को प्रदर्शित करती है। किताब एक घुमंतू व्यक्ति रुद्र और एक फकीर की कहानी पेश करती है। फकीर बाबा रुद्र को मृत्यु के बाद के सफर के सम्बंध में बताते हैं।

यह भरूचा की 2007 में आई किताब 'द फकीर' की अगली कड़ी है।

वह कहते हैं कि उन्होंने अपनी जिंदगी में देखा है कि शरीर और आत्मा की दो अलग समानांतर दुनिया होती हैं। भरूचा के लेखन का सफर उनकी पहली किताब 'द लास्ट मैराथन' से शुरू हुआ था।

बाद में उन्होंने 'द फकीर', 'डेवीज एमराल्ड' और 'रेस्ट इन पीसेज' किताबें लिखीं। उन्होंने गैर कथात्मक लेखन में 'शैडोज इन केजेज' और 'यमुना जेंटली वीप्स' किताबें लिखीं।

उन्होंने 'सेहत. विंग्स ऑफ फ्रीडम' नाम से एक वृत्तचित्र फिल्म भी बनाई है। इसमें तिहाड़ जेल में चलने वाले एचआईवी/एड्स जागरूकता कार्यक्रम पर रोशनी डाली गई है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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