शांति के नोबेल पुरस्कार से नवाजे गए लिउ (राउंडअप)
चीन में राजनीतिक बदलाव से सम्बंधित लिउ की आशावादिता और सुलह की आकांक्षा पुरस्कार समारोह में महत्वपूर्ण बिंदु रहे। इस समारोह का चीन ने बहिष्कार किया था।
लिउ को 2009 में एक अन्य लेखक के साथ मिलकर चीन में अधिक आजादी और लोकतंत्र के लिए 'चार्टर 08' लिखने के बाद देशद्रोह के आरोप में चीन सरकार ने तब 11 वर्ष के जेल की सजा दे दी।
नोबेल समिति के प्रमुख थोर्बजोर्न जागलैंड ने कहा, "चीन में मानवाधिकारों के लिए लंबे समय तक अहिंसक संघर्ष के लिए लिउ को यह पुरस्कार दिया गया है।"
समारोह में लिउ के उपस्थित न होने पर उन्होंने दुख प्रकट किया। जागलैंड ने समारोह में लिउ की पत्नी और उनके अन्य रिश्तेदारों की मौजूदगी न होने का भी उल्लेख किया।
लिउ और उनके किसी करीबी के समारोह में न आने पर समिति ने लिउ और उनके प्रयासों की सराहना करने के बाद पदक और उपाधि को एक खाली कुर्सी पर रख दिया।
समाचार एजेंसी 'डीपीए' के मुताबिक ओबामा ने चीन से लिउ को रिहा करने के लिए कहा है। हालांकि उन्होंने कहा कि वह चीन के लाखों लोगों को गरीबी से मुक्त कराने के प्रयासों की सराहना करते हैं, जो मानवाधिकार का महत्वपूर्ण घटक है।
अपने एक जारी बयान में उन्होंने कहा, "लेकिन लिउ हमें याद दिलाते हैं कि मानव की मर्यादा लोकतंत्र, मुक्त समाज और कानून के शासन पर भी निर्भर करती है।"
ओबामा ने कहा कि लिउ को जितना जल्दी हो सके जेल से रिहा किया जाना चाहिए।
शांति के लिए वर्ष 2009 का नोबेल पुरस्कार पाने वाले ओबामा ने कहा, "नोबेल पुरस्कार के लिए लिउ मुझसे ज्यादा योग्य हैं।"
उधर, दुनिया भर के 500 से अधिक वरिष्ठ लेखकों, साहित्यकारों ने लिउ की आजादी के लिए उठ रही आवाज से सुर मिलाते हुए अंतर्राष्ट्रीय साहित्य उत्सव बर्लिन में एक अपील पर हस्ताक्षर किए।
इस अपील पर सलमान रुश्दी, विक्रम सेठ, जॉन एशबेरी जैसे नामचीन साहित्यकारों ने हस्ताक्षर किए।
हस्ताक्षर करने वालों ने दुनिया भर के रेडियो स्टेशनों, सांस्कृतिक संस्थानों और स्कूलों से 20 मार्च, 2011 को चार्टर 08 और लिउ की कविता का पाठ करने का आान किया है।
लिउ आज नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाले दुनिया के एक मात्र व्यक्ति हैं, जो अभी जेल में बंद हैं।
पुरस्कार समारोह में भारत सहित दुनिया के अधिकांश देशों के राजदूत और प्रतिनिधि मौजूद थे।
उल्लेखनीय है कि चीन ने इस पुरस्कार समारोह में हिस्सा लेने वाले देशों को पहले ही चेताया था। अपने इस रुख को सख्ती से लागू करते हुए उसने पुरस्कार समारोह के सीधा प्रसारण पर रोक लगा दी।
उसने विदेशी टेलीविजन चैनलों सीएनएन और बीबीसी पर भी इस समारोह के प्रसारण और नोबेल फाउंडेशन की वेबसाइट पर भी रोक लगाई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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