भारत, यूरोपीय संघ को संरक्षणवाद से बचना चाहिए : मनमोहन
ब्रसेल्स, 10 दिसम्बर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भारत और 27 देशों वाले यूरोपीय संघ को आपसी व्यापारिक सहयोग बढ़ाने के लिए संरक्षणवाद को नजरअंदाज करते हुए अपने बाजार खुले रखने चाहिए।
11वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद मनमोहन सिंह ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि अपनी अर्थव्यवस्था एवं सामरिक समझौतों को आगे बढ़ाने के लिए दोनों पक्ष 'सही पटरी' पर हैं।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "संरक्षणवाद की प्रवृत्ति को दरकिनार करने में भारत और यूरोप को अहम भूमिका निभानी चाहिए, अपने बाजार खुले रखने चाहिए और मुक्त प्रवाह एवं जनांदोलन को प्रोत्साहित करना चाहिए।"
सिंह ने कहा कि उन्होंने यूरोपीय नेतृत्व को 'व्यापक सुअवसरों' के बारे में बताया है और यह भी कि भारत के ढांचागत विकास, उच्च प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विकास, स्वच्छ ऊर्जा तथा नवप्रवर्तन के लिए यूरोपीय निवेश की जरूरत है।
उन्होंने कहा, "हमें खासतौर से उद्यमिता विकास, व्यासायिक प्रशिक्षण तथा लघु एवं मध्यम उद्योगों की स्थापना में यूरोप के अनुभव का लाभ मिलेगा।"
शिखर सम्मेलन में दोनों पक्षों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की राह में आ रही समस्याओं पर भी चर्चा हुई।
वर्ष 2007 से ही कायम इस लंबे समझौते से द्विआयामी व्यापार का मूल्य मौजूदा 70 अरब यूरो से बढ़कर लगभग 100 अरब यूरो तक पहुंचने की संभावना है।
मनमोहन सिंह ने 'सराहनीय कार्य' के निष्पादन के लिए द्विपक्षीय समझौता वार्ता पर प्रसन्नता जताई और व्यापक व्यापार एवं निवेश करारनामे के लिए भी आह्वान किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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