खाली कुर्सी पर रखा गया जियाओबो का नोबेल
पुरस्कार ग्रहण करने के लिए जियाओबो की ओर से मंच पर कोई मौजूद नहीं था। ऐसी स्थिति में नोबेल समिति ने खाली कुर्सियों पर ही पुरस्कार रख कर पुरस्कार प्रदान किए जाने की रस्म निभाई। पुरस्कार समारोह में भारत सहित दुनिया के अधिकांश देशों के राजदूत और प्रतिनिधि मौजूद थे।
नोबेल समिति ने जियाओबो को मानवाधिकार का अगुआ करार दिया और कहा कि उन्होंने मानवाधिकारों की लड़ाई लड़ कर चीन में कोई अपराध नहीं किया है। समिति ने जियाओबो की रिहाई की पुरजोर मांग की। इस पर सभागार में उपस्थिति जनसमूह ने काफी देर तक तालियां बजा कर इस मांग का समर्थन किया।
ज्ञात हो कि जियाओबो फिलहाल चीन में कैद हैं। वह चीन सरकार द्वारा मुकर्रर 11 वर्ष के कारावास की सजा भुगत रहे हैं। चीन ने जियाओबो को नोबेल पुरस्कार दिए जाने का विरोध किया है। उसने दुनिया के सभी देशों से नोबेल पुरस्कार समारोह का बहिष्कार करने का आह्वान किया था। भारत के पड़ोसी श्रीलंका और नेपाल ने समारोह में अपने राजदूतों को नहीं भेजना का फैसला किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications