उत्पीड़न के मामलों में पुलिस के खिलाफ नौ हजार शिकायतें

'पुलिस आपकी सेवा के लिए सदैव तत्पर है', यह इबारत प्रदेश के सभी थानों की दीवारों व बोडरे पर लिखी गई है। इस पर उत्तर प्रदेश पुलिस कितनी कायम है, इसकी पोल सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत इटावा जनपद के सैफई निवासी अवधेश कुमार को राज्य मानवाधिकार आयोग (एचआरसी) से मिली जानकारी से खुल गई है।

एक जनवरी 2006 से 30 अगस्त 2010 तक आयोग के पास ऐसी 9,084 शिकायतें दर्ज हुई हैं जो पुलिस उत्पीड़न या पुलिस अभिरक्षा में उत्पीड़न से संबंधित हैं। सबसे ज्यादा 835 शिकायतें राजधानी लखनऊ से पहुंची हैं, जबकि सबसे कम चार शिकायतें छत्रपति शाहूजी महाराजनगर जिले के लोगों ने दर्ज कराई हैं।

आयोग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार झांसी से 100, जालौन से 131, अलीगढ़ से 119, आगरा से 143, कानपुर नगर से 268, कौशाम्बी से 144, प्रतापगढ़ से 313, फ तेहपुर से 132, वाराणसी से 344, उन्नाव से 209, सीतापुर से 735, रायबरेली 219, लखनऊ से 835, लखीमपुर खीरी से 136, हरदोई से 182, बरेली से 146, मुरादाबाद से 117, गाजियाबाद से 177 और मुजफरनगर से 130 लोगों ने राज्य मानवाधिकार आयोग (एचआरसी) के समक्ष शिकायत दर्ज कराकर पुलिस से जान बचाने की फरियाद की है।

इतना ही नहीं यूपी पुलिस पर दूसरे राज्यों के लोगों के उत्पीड़न का भी आरोप है। इस तरह की 17 शिकायतें आयोग में पहुंची हैं।

ह्यूमन राइट्स ला नेटवर्क से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता शिवकुमार मिश्र का कहना है, 'यूपी पुलिस मानवाधिकार उल्लंघन की आदी है।'

वहीं, बांदा के पुलिस उप महानिरीक्षक बीपी त्रिपाठी का मानना है कि कानून का पालन करने पर पुलिस की फजीहत होती है। लोग आयोग में फर्जी शिकायतें दर्ज करा रहें हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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