संसद में गतिरोध से सांसद निराश, लेकिन पार्टी के साथ
यह बात अलग है कि इनमें से कोई भी अपनी पार्टी के फरमान को चुनौती देना नहीं चाहता।
हरियाणा के सिरसा से कांग्रेस सांसद अशोक तंवर ने कहा कि रोज-रोज कार्यवाही स्थगित होने से समय, पैसा और ऊर्जा सब बर्बाद हुआ है।
उन्होंने कहा, "हम पहली बार सांसद बने हैं और यहां सीखने आए हैं, लेकिन यह अलग ही तरह का अनुभव है। हम इस समय बहुत निराश हैं।"
उत्तर प्रदेश के बदायूं से समाजवादी पार्टी सांसद धर्मेद्र यादव ने कहा कि विपक्ष चाहता है कि संसद में कामकाज हो लेकिन सरकार लगातार संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठित करने की मांग को दरकिनार कर रही है।
यादव ने कहा, "हमारी मांग राष्ट्रहित में है। इससे छोटे घोटालों के लिए जेपीसी का गठन किया जा चुका है। कहीं न कहीं सरकार दोषी है।"
केरल कांग्रेस (मणि) के सांसद के. मणि ने कहा कि यह गतिरोध भारतीय संसदीय इतिहास का सबसे ज्यादा लंबा गतिरोध बनने का खतरा है, संभवत: यह बजट सत्र में भी जारी रह सकता है।
उन्होंने कहा, "संसदीय कामकाज नहीं होने पर भी मैं काफी व्यस्त रहा। मैनें अपना समय विकास कार्यो को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न शिष्टमंडलों के साथ सरकारी कार्यालयों में बिताया।"
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्यसभा सदस्य पी. राजीव ने गतिरोध के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा, "हमारे पास कई काम थे।" दोपहर में विरोध के बाद हम पार्टी के अन्य कार्यो में व्यस्त रहते थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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