कश्मीर समस्या के राजनीतिक हल की रूपरेखा जल्द : चिदम्बरम
चिदम्बरम यहां गृह मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में 'जम्मू कश्मीर संबंधी मुद्दे' संबंधी विषय पर चर्चा हुई।
उन्होंने कहा कि वार्ताकारों के समूह की पहली और दूसरी रिपोर्ट में विश्वास बहाली के उपायों पर चर्चा की गई है। उन्होंने वार्ताकारों के समूह से कहा है कि अब वह राजनीतिक समाधान की रूपरेखा पर ध्यान केंद्रित करें। वार्ताकारों के प्रयासों की सराहना करते हुए चिदम्बरम ने कहा कि वार्ताकारों के प्रयासों से अच्छी प्रगति हुई है।
चिदम्बरम ने कहा कि कश्मीर मुद्दा एक राजनैतिक मुद्दा है, इसलिए उसका राजनीतिक समाधान ही खोजा जाना चाहिए। बहरहाल, शांति और सुशासन राजनैतिक समाधान के लिए जरूरी हैं। चिदम्बरम ने कहा कि जम्मू कश्मीर में दो तरह की हिंसाएं हैं और दोनों के लिए अलग अलग तरह के कदम उठाए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि आतंकवादियों और घुसपैठियों द्वारा की जाने वाली हिंसा से सख्ती से निपटा जाना चाहिए तो दूसरी तरफ जम्मू कश्मीर के नागरिकों द्वारा किए जाने वाले प्रदर्शनों में होने वाली हिंसा से तुरंत और संवेदनशीलता से निपटा जाना जरूरी है।
गृहमंत्री ने कहा कि जम्मू कश्मीर के लिए सरकार द्वारा आठ सूत्री योजना की घोषणा के बाद राज्य में हालात में उल्लेखनीय सुधार आया है। इस प्रक्रिया को मजबूत करने की आवश्यकता है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को अवसर देना चाहिए। कामकाज बेहतर तरीके से होना चाहिए। सुरक्षा बलों की प्रत्यक्ष मौजूद्गी में कमी करनी चाहिए।
चर्चा में भाग लेते हुए सदस्यों ने राज्य के हालात सुधारने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की। कुछ सदस्यों का सुझाव था कि कश्मीर मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक सहमति बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए। सदस्यों ने राज्य में, खासतौर से शिक्षित युवाओं के लिए रोजगार सृजन की आवश्यकता पर भी बल दिया। सदस्यों ने सशस्त्र सेना विशेषाधिकार अधिनियम में संशोधन और कश्मीरी विस्थापितों के पुनर्वास की सलाह भी दी।
बैठक में प्रो़ रामगोपाल यादव, भुवनेश्वर कालिता, रीशांग कीशिंग, एच़ क़े दुआ और डा़ अशोक शेखर गांगुली (सभी राज्यसभा), डा़ थोकचम मीनया, डा़ रत्तन सिंह अजनाला और एऩ धरम सिंह (सभी लोकसभा) के साथ गृह राज्यमंत्री मुल्लापल्ली रामचंद्रन भी उपस्थित थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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