प्रसार भारती के सीईओ आए जांच के दायरे में (लीड-1)
सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति ने यह सहमति इस मामले में सरकार के संदर्भ पर व्यक्त की है। इसके साथ ही लाली को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। उन्हें जांच जारी रहने तक निलम्बित किया जा सकता है।
एक बयान में लाली ने कहा, "संस्थान में मेरे खिलाफ साजिश रची गई है और शरारत की गई है। जांच से सच्ची तस्वीर सामने आ जाएगी।"
उन्होंने कहा, "दुभाग्यपूर्ण बात यह है कि बाहरी शक्तिशाली तत्व मेरे खिलाफ साजिश रचने वालों को बढ़ावा दे रहे हैं। उनका एकमात्र मकसद है एक व्यक्ति की छवि को धूमिल करना और प्रमुख लोकतांत्रिक संस्थान को पटरी से उतारना।"
लाली ने कहा, "मैं उम्मीद करता हूं कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जांच कराए जाने से जल्द ही सच्ची तस्वीर जनता के सामने आ जाएगी।" उन्होंने यह भी कहा कि न्यायिक जांच से भ्रामक दुष्प्रचार की कलई खुलेगी। कानून सही 'निष्कर्ष' पर पहुंचेगा।
लाली ने रेखांकित किया कि एक तरफ तो उन्हें इस बात का दुख है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के तहत 40 वर्षो की 'बेदाग' सेवा के बाद उन्हें इस स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, दूसरी ओर भरोसा भी है कि जांच के दौरान अंतत: उनकी बात सुनी जाएगी।
उन्होंने कहा, "लम्बे अरसे बाद यह मौका आया है जब तथ्यों से पर्दा हटेगा और उन अटकलबाजियों पर विराम लगेगा जो आधी सच और पूरी तरह झूठी है।"
लाली का यह बयान तब आया है जब आधिकारिक सूत्रों ने गुरुवार को कहा किराष्ट्रपति पाटील ने लाली पर लगे वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच सर्वोच्च न्यायालय से कराने की अनुमति दे दी है।
उल्लेखनीय है कि प्रसार भारती, देश का लोक प्रसारक है और दूरदर्शन तथा आकाशवाणी उसके अंग हैं।
लाली भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1971 बैच के अधिकारी हैं। केंद्रीय सतर्कता आयोग ने लाली पर संसदीय विशेषाधिकार का उल्लंघन कर कुछ प्रसारण कंपनियों को फायदा पहुंचाने और वित्तीय कुप्रबंधन में शामिल होने का आरोप लगाया है।
लाली दिसम्बर 2006 से प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। प्रचार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति एक पैनल करता है, जिसमें प्रधानमंत्री, राज्यसभा के सभापति और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष शामिल होते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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