साइबर युद्ध की शुरूआत

हैक हुई एक वेबसाइट का बिगड़ा हुआ हुलिया
गोपनीय जानकारियाँ लीक करके जूलियन असांज ने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है, लंदन में उनकी गिरफ़्तारी के बाद भी यह सिलसिला जारी है.
उनकी वेबसाइट विकीलीक्स को कई बार हैकिंग का निशाना बनाया गया और एक बार तो वेबसाइट कुछ समय बंद रहने के बाद दोबारा शुरू हुई.
मगर अब जवाबी हमले भी शुरू हो गए हैं, कुछ लोगों ने असांज की ओर से बदला लेना शुरू किया है और ऐसी वेबसाइटों को निशाना बना रहे हैं जिन्हें विकीलीक्स का विरोधी माना जाता है, यानी विकीलीक्स की वजह से साइबर वार की शुरूआत हो गई है.
किसी वेबसाइट में सेंधमारी करके उसका हुलिया बिगाड़ देने, उसे बंद होने पर मजबूर करने या उससे जानकारियाँ उड़ा लेने वाले लोगों को हैकर कहा जाता है लेकिन इस मामले में अलग बात ये है कि जो लोग जूलियन असांज के विरोधियों की वेबसाइटों पर हमले कर रहे हैं वे इसे एक राजनीतिक अभियान के तौर पर देखते हैं, इसीलिए एक्टिविस्ट और हैकर को मिलाकर उनके लिए एक शब्द बनाया गया है-- हैकटिविस्ट.
इक्का-दुक्का हैकिंग की घटनाएँ तो अक्सर चलती रहती हैं लेकिन इस तरह की दोतरफ़ा लड़ाई कम ही देखने को मिलती है.
क्रेडिट कार्ड कंपनी वीज़ा ने कल ही विकीलीक्स को मिलने वाले चंदे को प्रोसेस करने से मना कर दिया था, पिछली रात वीज़ा की वेबसाइट हैक्टिविस्टों का निशाना बनी.
दूसरी बड़ी क्रेडिट कार्ड कंपनी मास्टरकार्ड का कामकाज भी बाधित हुआ है.
बड़ा अभियान
बीबीसी से बातचीत में हैकरों के एक गुमनाम प्रवक्ता ने कहा कि कंप्यूटर डेटा के इस युद्ध हज़ारों लोग उनके साथ जुड़ रहे हैं.
कई बार हैक हुई वेबसाइट पर इस तरह के संदेश दिखाई देते हैं
रेडियो इंटरव्यू में हैक्टिविस्ट की जवाबी कार्रवाई का नेतृत्व करने वाले इस व्यक्ति ने कहा कि "इंटरनेट का मतलब ही है सबके लिए पूरी आज़ादी लेकिन सरकारें और कुछ कंपनियाँ विकीलीक्स पर हमले करके स्वतंत्रता को छीनने की कोशिश कर रही हैं जिसका ज़ोरदार प्रतिकार जवाबी हैकिंग के ज़रिए किया जा रहा है".
इंटरनेट सिक्युरिटी से जुड़े एक विशेषज्ञ का कहना है कि वीज़ा की वेबसाइट पर हमला करना मुश्किल काम था, जानकारों का अनुमान है कि वीज़ा की वेबसाइट पर हमला कम से कम दो हज़ार हैक्टिविस्टों ने मिलकर किया होगा.
यह कुछ ऐसा ही है कि कड़ी सुरक्षा वाली एक इमारत पर दो हज़ार लोग अचानक धावा बोल दें.
दुनिया की दो बड़ी क्रेडिट कार्ड कंपनियों, वीज़ा और मास्टरकार्ड के ज़रिए हर रोज़ करोड़ों डॉलर का लेनदेन होता है.
इन हैकरों ने विकीलीक्स के ख़िलाफ़ मुक़दमे में सरकारी वकील की वेबसाइट को भी हैक कर लिया है.
हैक्टिविस्टों का कहना है कि वे दुनिया की बड़ी कंपनियों को तबाह नहीं करना चाहते बल्कि उन्हें जगाना चाहते हैं कि वे आम जनता की आवाज़ को समझें, सिर्फ़ सरकारों के इशारों और आदेशों को नहीं.


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