घोटाले पर कार्रवाई करेंगी मायावती

घोटाले पर कार्रवाई करेंगी मायावती

रामदत्त त्रिपाठी

बीबीसी संवाददाता, लखनऊ

उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार ने कहा है कि वह बहुचर्चित खाद्यान्न घोटाले में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है.

लेकिन साथ ही सरकार ने स्पष्टीकरण दिया है कि घोटाले की रक़म उतनी ज़्यादा नहीं है, जितना मीडिया में बताया जा रहा है.

हाई कोर्ट में मामले की जनहित याचिका दायर करने वाले विश्वनाथ चतुर्वेदी का कहना है कि मायावती सरकार दोषियों को बचा रही है.

केंद्र सरकार अंत्योदय, अन्नपूर्णा, मिड डे मील, बीपीएल और ग्रामीण रोज़गार योजना में ग़रीबों और मज़दूरों के लिए सस्ता अनाज राज्यों को देती है.

वर्ष 2004 में मुलायम सरकार के दौरान इस बात का पता चला था कि इस अनाज का एक हिस्सा खुले बाज़ार में बेच दिया जाता है.

यह भी कहा गया कि यह अनाज चोरी छिपे बांग्लादेश और नेपाल भेज दिया गया. तत्कालीन सरकार ने जाँच का आदेश दिया, लेकिन कुछ हुआ नही.

वर्ष 2007 में सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री मायावती ने इसे बहुत गंभीर घोटाला बताते हुए सीबीआई से जांच कराने की सिफ़ारिश की, जिसके आधार पर हाईकोर्ट ने भी सीबीआई जांच का आदेश दिया.

सीबीआई सीतापुर, लखीमपुर और बलिया ज़िलों में जांच कर रही है. इसके अलावा राज्य पुलिस की विभिन्न शाखाओं को भी जांच दी गई.

लेकिन पिछले सप्ताह एक जनहित याचिका पर फ़ैसला देते हुए हाईकोर्ट ने इस बात पर चिंता प्रकट की कि मायावती सरकार ने दोषी पाए गए लोगों पर मुक़दमा चलने की अनुमति सीबीआई को नही दी है.

हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा कि लोक सेवकों पर भ्रष्टाचार का मुक़दमा चलाने के लिए सरकार से अनुमति लेने की आवश्यकता नही है.

याचिकाकर्ता के अनुसार लगभग 400 लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की अनुमति लंबित है.

इसके बाद मीडिया में ख़बरें आई कि यह बहुत बड़ा घोटाला है, जिसकी रक़म दो लाख करोड़ तक हो सकती है.

सूचना विभाग के प्रमुख सचिव विजय शंकर पाण्डेय ने एक प्रेस कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री मायावती की ओर से भरोसा दिलाया कि सरकार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी.

उन्होंने कहा, "माननीय मुख्यमंत्री जी का स्पष्ट मत है कि एक भी पैसे की चोरी अक्षम्य है. यह सवाल नहीं है कि यह घोटाला एक हज़ार करोड़ का है, 40 हज़ार करोड़ का है या दो लाख करोड़ का. यह मायने नहीं रखता. घोटाला घोटाला है और जिन लोगों ने भी सरकारी धन का दुरुपयोग किया है या जिन लोगों के लिए गेहूँ, चावल दिया गया था, उनका निवाला छीना है उन्हें दंड मिलना चाहिए."

उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट आदेश के अनुसार गोंडा, बनारस और लखनऊ को भी जाँच के दायरे में ला दिया गया है.

साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश को सारी योजनाओं में एक साल में मिलाकर 2000 करोड़ का अनाज केंद्र से मिलता है और उसका कुछ ही हिस्सा घोटाले में गया होगा, इसलिए यह उतना बड़ा घोटाला नही है, जितना कहा जा रहा है.

विजय शंकर पाण्डेय ने बताया कि सभी जाँच एजेंसियों ने कुल मिलाकर अब तक 19 ज़िलों में 244 मुक़दमे दर्ज कराए हैं, इनमे लगभग 64 करोड़ रुपयों के अनाज शामिल है.

लेकिन हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने वाले विश्वनाथ चतुर्वेदी का कहना है कि घोटाला बहुत बड़ा है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार झूठ बोल रही है और वह दोषियों को बचाना चाहती है.

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