जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में गतिरोध कायम
कानकुन(मेक्सिको), 9 दिसम्बर (आईएएनएस)। जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक संधि के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और विकसित देशों के कार्बन उत्सर्जन में कटौती से इंकार करने के कारण संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में गतिरोध बुधवार को भी बरकरार रहा।
'29 नवंबर से 10 दिसम्बर तक यूएन फ्रेमवर्क कंवेशन ऑन क्लाइमेंट चेंज' सम्मेलन में जापान, रूस और अन्य विकसित देशों द्वारा कानूनी रूप से बाध्यकारी ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन में कटौती वर्ष 2012 के बाद क्वोटो प्रोटोकाल के तहत करने से इंकार करने पर गतिरोध बन गया है।
इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए विकसित देशों ने प्रोटोकाल के तहत ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती की वर्तमान समय सीमा बढ़ाने वाला एक प्रस्ताव पेश किया।
प्रस्ताव के तहत यदि भारत और उभरती अर्थव्यवस्था वाले देश संधि में शामिल होने के लिए राजी हो जाते हैं तो विकसित देश अपने उत्सर्जन की तीव्रता कम करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होंगे।
उधर, पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने इस प्रस्ताव को 'पूरी तरह से अस्वीकार्य' घोषित कर दिया। उनके इस निर्णय का चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका ने समर्थन किया।
भारतीय शिष्टमंडल के एक वरिष्ठ सदस्य ने नाम उजागर न करने पर आईएएनएस को बताया, "विकसित देशों ने इस संधि के लिए मंगलवार को भारत को मनाने की बहुत कोशिश की, लेकिन हमने इसका जमकर विरोध किया। उन्होंने हमें धमकी दी कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए चलाए जा रहे अभियान के लिए वे हमें धन नहीं देंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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