'भारत को शिक्षा के आधुनिकीकरण की जरूरत'
नई दिल्ली, 9 दिसम्बर (आईएएनएस)। एक ओर जहां भारत वैश्विकरण के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है वहीं इसे आने वाले समय की मांगों को पूरा करने के लिए शिक्षा प्रणाली के आधुनिकीकरण की आवश्यकता है। ये कहना है 'हार्वर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ एजुकेशन' के प्रोफेसर डेविड पर्किं स का। पर्किं स मानते हैं कि अब ऐसी शिक्षा पद्धति की आवश्यकता है जो अर्थपूर्ण ज्ञान दे सके।
पर्किं स ने आईएएनएस से एक ई-मेल साक्षात्कार में कहा, "मैं दुनिया के विभिन्न हिस्सों की शिक्षा पद्धतियों से परिचित हूं। मेरे विचार से आज की शिक्षा की सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसी प्रणाली विकसित करना है जो लोगों को उनका अस्तित्व बनाए रखने के लिए कहे और लोगों को इस जटिल वैश्विक युग में रहने का कौशल और अंतर्दृष्टि प्रदान कर सके।"
पर्किं स का कहना है कि अब भारत को शिक्षा को व्यावहारिक बनाने की जरूरत है और इसके लिए 'स्कूल्स ऑफ टुमॉरो' होने चाहिए।
उन्होंने कहा, "'स्कूल्स ऑफ टुमॉरो' के सम्बंध में मेरी निजी समझ इतनी है कि इस तरह के स्कूलों में व्यावहारिक शिक्षा मिलेगी। यह ऐसी शिक्षा होगी जो छात्रों के जीवन से अर्थपूर्ण ढंग से जुड़ सकेगी।"
विशेषज्ञों का कहना है कि एक अरब से ज्यादा आबादी वाले देश में सभी लोगों तक शिक्षा की पहुंच बना पाना एक चुनौती है। कुछ सर्वेक्षणों के मुताबिक यूं तो 2007 में स्कूल जाने वाले छात्रों की संख्या 83 प्रतिशत तक बढ़ गई थी लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता एक अहम समस्या बनकर उभरी। शिक्षकों की अनुपस्थिति और उनका कम योग्य होना कुछ प्रमुख मुद्दे थे।
पर्किं स जोर देते हुए कहते हैं कि शिक्षा में व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। पर्किं स कई किताबें लिख चुके हैं। हाल ही में उनकी नई किताब 'मेकिंग लर्निग होल' प्रकाशित हुई है।
भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में शिक्षा पद्धति में बदलाव की आवश्यकता पर चर्चा हो रही है। भारतीय शिक्षा प्रणाली अब भी ब्रिटिश पद्धति पर आधारित है।
अब शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद सरकार शिक्षा तंत्र के मानकीकरण की प्रक्रिया में है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications