जलवायु परिवर्तन पर भारत ने रखा महत्वपूर्ण प्रस्ताव
कानकुन (मेक्सिको), 9 दिसम्बर (आईएएनएस)। कानकुन में चल रहे जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में भारत ने गतिरोध तोड़ने के लिए वैश्विक संधि के लिए महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सभी देशों को 'उचित कानूनी बाध्यकारी प्रतिबद्धता' सुनिश्चित करने का प्रस्ताव रखा है।
कानकुन में चल रहे 29 नवम्बर से 10 दिसम्बर तक के संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में भारत ने इस प्रस्ताव के जरिए अपनी छवि एक ईमानदार मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया है।
सम्मेलन में बुधवार शाम को रमेश ने कहा, "जलवायु परिवर्तन का कारण बन रहीं ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के लिए सभी देशों को उचित कानूनी रूप में बाध्यकारी प्रतिबद्धता सुनिश्चित करनी चाहिए।"
जलवायु परिवर्तन पर पिछले 17 वर्ष से जारी वार्ता में भारत का यह प्रस्ताव अब तक का सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। भारत ने इस मुद्दे पर विकासशील देशों का नेतृत्व किया है। विकासशील देशों का रुख रहा है कि जलवायु परिवर्तन की समस्या का कारण धनी देश हैं और उन्हें अपने ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी करनी चाहिए।
अमेरिका एकमात्र ऐसा धनी देश है जिसने कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए अब तक की एक मात्र वैश्विक संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। अमेरिका का स्पष्ट रुख रहा है कि वह किसी भी तरह का कानूनी बाध्यकारी समझौता तब तक नहीं करेगा जब तक कि भारत और चीन ऐसा नहीं करते।
बड़े विकासशील देशों ने अमेरिका के इस रुख का लगातार विरोध किया है जिसके चलते जलवायु परिवर्तन पर वार्ता बाधित रही है। भारत ने पिछले साल कोपेनहेगन सम्मेलन में अपने रुख में परिवर्तन लाते हुए अपने कार्बन उत्सर्जन में 2020 तक 2005 की तुलना में 20-25 प्रतिशत तक कमी करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications