भाजपा से दोबारा हाथ मिला सकती है अगप
अगप के अध्यक्ष चंद्र मोहन पटवारी ने आईएएनएस को बताया, "हम यह महसूस कर रहे हैं कि असम में गैर कांग्रेसी सरकार बनाने के लिए सशक्त विपक्ष की आवश्यकता है। मुख्य विपक्षी दल होने के नाते अगप राज्य की सभी विपक्षी पार्टियों के अपील करती है कि वे कांग्रेस को चुनौती देने के लिए एक मंच पर आकर खड़े हों।"
उन्होंने कहा, "यदि हमें किसी राष्ट्रीय पार्टी से ऐसे प्रस्ताव मिलते हैं तो हमे विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर उस पर विचार करना चाहिए। वर्तमान में हालांकि हम अभी क्षेत्रीय दलों के साथ ही बातचीत कर रहे हैं।"
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2009 में संसदीय चुनावों के दौरान अगप और भाजपा ने एकसाथ मिलकर चुनाव लड़ा था। लोकसभा चुनाव में अगप 14 सीटों पर विजयी हुई थी जबकि भाजपा ने पिछली बार दो सीटों की जगह चार सीटों पर सफलता हासिल की थी। अगप को एक सीट का नुकसान हुआ था।
अगप ने सितम्बर में भाजपा के साथ अपने सम्बंधों को यह कहकर तोड़ लिया था कि भाजपा समर्थकों ने लोकसभा चुनावों में अगप के लिए मतदान नहीं किया था।
उधर, भाजपा की असम इकाई के अध्यक्ष रंजीत दत्ता ने कहा, "हम पहले ही चाहते थे कि कांग्रेस से लड़ने के लिए विपक्ष एकजुट रहे लेकिन अगप ने हमारे साथ समझौते को तोड़ दिया था।"
अगप के लिए भाजपा के साथ दोबारा हाथ मिलाना आसान नहीं होगा क्योंकि पार्टी के कई बड़े नेता इसके खिलाफ हैं। उनका मानना है कि जमीनी स्तर के कार्यकर्ता दरअसल भाजपा के साथ किसी प्रकार के समझौते के खिलाफ हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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