गैर-परम्परागत नौकरी करने वालों संग होता है सख्त बर्ताव
शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि पुरुषों का कार्यक्षेत्र समझे जाने वाले स्थल पर महिलाएं और महिलाओं का कार्यक्षेत्र समझे जाने वाले स्थल पर पुरुष नौकरी करते हैं तो उनके साथ ऐसी स्थिति बन सकती है।
येल विश्वविद्यालय की मनोवैज्ञानिक व अध्ययनकर्ता विक्टोरिया ब्रिस्कोल कहती हैं कि अक्सर नस्लवाद और लिंग के आधार पर बनी बाधाओं को तोड़ने की बात उठती रहती है इसलिए उन्होंने इस तरह के अध्ययन में रुचि दिखाई।
जर्नल 'साइकोलॉजिकल साइंस' के मुताबिक ब्रिस्कोल कहती हैं कि जो लोग सामान्यतौर पर उनके लिंग के विपरीत मानी जाने वाली नौकरी करते हैं तो कोई गलती करने पर उनके परेशानी में फंसने या फिर उनके खिलाफ कठोर बर्ताव होने का खतरा रहता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोग बहुत छोटी गलती करें तो भी उसे बहुत बड़ा करके देखा जाता है।
ब्रिस्कोल और उनके साथी अध्ययनकर्ताओं ने स्त्री और पुरुषों के अलग-अलग कार्यक्षेत्र मानी जाने वाली नौकरियों की सूची के आधार पर यह अध्ययन किया।
अध्ययन के परिणाम बताते हैं कि लिंग के प्रति रूढ़िवादी विचार न रखने वाले लोगों ने भी कार्यक्षेत्र में लिंग के आधार पर कम सक्षम और कम योग्य लोगों के प्रति कठोर व्यवहार किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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