हिंदी के 9 उपन्यासों का लोकार्पण
नई दिल्ली, 8 दिसम्बर (आईएएनएस)। दिल्ली के रफी मार्ग स्थित साहित्य अकादमी के सभागार में बुधवार को आयोजित एक संगोष्ठी में वरिष्ठ आलोचक निर्मला जैन और बहुचर्चित कथाकार उदय प्रकाश ने वाणी प्रकाशन से सद्य: प्रकाशित नौ उपन्यासों का लोकार्पण किया।
निर्मला जैन ने कहा, "जिन उपन्यासों में पठनीयता का अभाव होता है, पाठक उन्हें लम्बे समय तक अपने जेहन में नहीं रख पाते।"
इस अवसर पर लोकार्पित पांच उपन्यास हैं- पहर दोपहर (असगर वजाहत), असबाब-ए-वीरानी (रमेशचंद्र शाह), जो घाटी ने कहा (पुन्नी सिंह), उसी शहर में उसका घर (ध्रुव शुक्ल), जख्म हमारे (मोहनदास नैमिषराय), चांद एट द रेट डॉट कॉम (विमल कुमार), तीसरी ताली (प्रदीप सौरभ) और मुमताज महल (सुरेश कुमार वर्मा)।
नैमिषराय के उपन्यास पर चर्चा करते हुए निर्मला जैन ने कहा, "हिंदू समाज के इतिहास को यदि राजनीति के आईने में देखें तो जातियों की संरचना को मजबूत करने की प्रक्रिया मिलती है। नैमिषराय ने अपने उपन्यास में सवर्णवादी, साम्प्रदायिक सोच को सामने रखने की कोशिश की है।"
प्रदीप सौरभ ने कहा कि उन्होंने अपने उपन्यास 'तीसरी ताली' के माध्यम से राजनीति में आए सतहीपन और किन्नरपन को सामने लाने का प्रयास किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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