बुंदेलखण्ड में मनरेगा का बुरा हाल

अखिल भारतीय बुंदेलखण्ड विकास मंच के महासचिव नसीर अहमद सिद्दीकी द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में केंद्र सरकार ने माना है कि समूचे बुंदेलखड में 66 फीसदी राशि ही मजदूरों तक पहुंच पाई है।

आंकड़ों में बताया गया है कि 'राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना पर चालू वित्त वर्ष में बुंदेलखण्ड के सातों जनपदों में 183़.46 करोड़ रुपये व्यय हुए हैं। बांदा में मजदूरी पर 23 करोड़, सामग्री क्रय में 10 करोड़ और प्रशासनिक खर्च में 82 लाख रुपये व्यय हुए हैं।

चित्रकूट जनपद में मजदूरी पर 12 करोड़, सामग्री और प्रशासनिक खर्च में 5-5 करोड़, हमीरपुर में मजदूरी पर 19 करोड़, सामग्री क्रय में 9 करोड़, प्रशासनिक खर्च पर 3़ 50 करोड़ व्यय किए गए हैं। इसी तरह महोबा जनपद में मजदूरी पर 8 करोड़, सामग्री पर 3 करोड़ प्रशासनिक खर्च पर 26 लाख रुपये व्यय किए गए हैं। झांसी में मजदूरी पर 23 करोड़, सामाग्री पर 5़.47 करोड़, प्रशासनिक खर्च 35.45 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।

नसीर अहमद का कहना है कि 'मनरेगा अफसरों के लिए 'कामधेनु' बन गया है, बुंदेलखण्ड से हजारों की तादाद में काम के अभाव में मजदूर पलायन कर गए हैं।"

इस सम्बंध में बांदा के आयुक्त ओ.पी.एन. सिंह का कहना कि मनरेगा की राशि का प्रशासनिक मद में अधिक उपयोग किए जाने के मामले की जांच कराई जाएगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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