रिश्वत लेने वाले चिकित्सक को कैद
जानकारी के मुताबिक मुखर्जी को दो अक्टूबर, 1997 को छात्र विजय बाघ से पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए जबलपुर के लोकायुक्त संगठन ने रंगे हाथों पकड़ा था। परीक्षा में पास कराने के एवज में छात्र से यह राशि मांगी गई थी। लोकायुक्त ने विवेचना में साक्ष्य अभियोजन के योग्य पाए जाने पर न्यायालय में सितंबर 1998 में चालान पेश किया था।
इस मामले की सुनवाई के बाद विशेष न्यायालय के पीठासीन अधिकारी ने अपने निर्णय में विभिन्न धाराओं में डा. मुखर्जी को दोषी ठहराते हुए एक-एक साल की कैद और 5000-5000 का अर्थदण्ड दिया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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