विकिलीक्स खुलासा : ब्रिटेन गद्दाफी से भयभीत था
समाचार पत्र 'डेली टेलीग्राफ' के अनुसार त्रिपोली में तत्कालीन ब्रिटिश राजदूत सर विंसेंट फीन ने यह भी चेतावनी दी थी कि अब्देलबासेत अल-मेगराही को स्कॉटलैंड में यदि लगातार कैद रखा गया तो उसका "लिबिया में ब्रिटिश हितों पर घातक असर पड़ सकता है।"
अल-मेगराही को लॉकरबी हवाई त्रासदी के लिए 2001 में जेल भेज दिया गया था। वर्ष 1988 में हुई उस त्रासदी में 270 लोग मारे गए थे। अल-मेगराही को अगस्त 2009 में दया के आधार पर स्कॉटलैंड सरकार ने रिहा कर दिया था। चिकित्सा विशेषज्ञों ने कहा था कि अल-मेगराही के पास मात्र तीन महीने का जीवन शेष था।
ब्रिटिश हितों को नुकसान होने सम्बंधी चेतावनियां त्रिपोली स्थित अमेरिकी दूतावास से अगस्त 2009 भेजे गए गोपनीय संदेशों में दर्ज हैं। विकिलीक्स के खुलासे के बाद इन संदेशों को जर्मनी के 'डेर स्पीगल' पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।
एक संदेश में कहा गया है, "ब्रिटिश राजदूत ने इस बात पर राहत की सांस ली कि मेगराही दया के आधार पर होने वाली रिहाई के चलते लीबिया वापस लौट सकते हैं।"
संदेश में कहा गया है, "राजदूत ने कहा था कि मेगराही के अनुरोध को खारिज किए जाने का लीबिया में ब्रिटिश हितों पर घातक असर हो सकता था।"
संदेश में राजदूत के हवाले से लिखा है, "वे हमें स्विडजर लैंड के नागरिकों की तरह घुटने तक उड़ा सकते थे।"
इस चेतावनी में गद्दाफी द्वारा 2008 में स्विटजरलैंड के खिलाफ किए गए जिहाद के आह्वान का जिक्र किया गया है। गद्दाफी ने जिहाद का यह आह्वान अपने बेटे हैनिबल और बहू एलिन स्काफ की पुलिस गिरफ्तारी के बाद किया था।
उसके बाद दोनों दम्पति को रिहा कर दिया गया था और नौकरों के साथ कहासुनी सम्बंधी आरोपों को उठा लिया गया था। लेकिन इसके बावजूद लीबिया ने गिरफ्तारी के जवाब में स्विस बैंकों से अरबों डॉलर की राशि निकाल ली थी, तेल आपूर्ति ठप कर दी थी, वीजा जारी करने से इंकार कर दिया था और अपने राजनयिकों को वापस बुला लिया था।
अल-मेगराही की अगस्त में रिहाई के समय तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री गार्डन ब्राउन ने कहा था कि इस रिहाई में ब्रिटिश सरकार की कोई भूमिका नहीं है।
इंडो-एशिन न्यूज सर्विस।


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