हस्तक्षेप करने वाले मंत्री का नाम नहीं बताया गया था : बालाकृष्णन (लीड-1)
बालाकृष्णन अभी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष हैं। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि दो जुलाई को न्यायमूर्ति रघुपति ने न्यायमूर्ति गोखले को पत्र लिखा.. जिन्होंने मुझे एक संक्षिप्त रिपोर्ट भेजी।
उन्होंने कहा कि गोखले के एक पृष्ठीय पत्र में रघुपति पर दबाव बनाने वाले केंद्रीय मंत्री का नाम नहीं था।
बालाकृष्णन ने कहा कि वर्तमान प्रधान न्यायाधीश के कार्यालय में यह पत्र अभी भी मिल सकता है।
मद्रास उच्च न्यायालय ने मंगलवार को न्यायाधीश पर दबाव बनाने की कोशिश करने वाले वकील आर. के. चंद्रमोहन को तमिलनाडु और पुड्डचेरी के बार काउंसिल के अध्यक्ष पद से निलंबित कर दिया।
पिछले साल न्यायमूर्ति रघुपति ने अदालत में घोषणा की थी एक केंद्रीय मंत्री ने उन पर दो लोगों को जमानत देने के लिए दबाव बनाने की कोशिश की थी, जिनके खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो जांच कर रहा था।
उन्होंने कहा था कि चंद्रमोहन ने उनके हाथ में मोबाइल फोन देकर कहा था कि मंत्री उनसे बात करना चाहते हैं।
बालाकृष्णन ने एक बयान जारी कर कहा कि जब यह प्रकरण मीडिया में आया तो उन्होंने मद्रास उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश से इस बारे में एक रिपोर्ट देने के लिए कहा। लेकिन रिपोर्ट में किसी मंत्री द्वारा रघुपति को टेलीफोन कर उसपर दबाव बनाने का कोई जिक्र नहीं था।
इसलिए इस पर कार्रवाई करने या प्रधानमंत्री से चर्चा करने का कोई कारण नहीं बनता था। इसके अलावा यदि किसी मंत्री ने उन पर दबाव बनाने की कोशिश की थी, तो रघुपति खुद अदालत की अवमानना का मामला बना सकते थे। इसके लिए उन्हें प्रधान न्यायाधीश की अनुमति की जरूरत नहीं थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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