जलवायु सम्मेलन : मून ने किया गम्भीर कदम उठाने का आग्रह
समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार मून ने विशाल मून पैलेस होटल में अपने उद्घाटन भाषण में कहा, "हम जितनी देर करेंगे, हम आर्थिक, पर्यावरणीय और मानव जीवन के रूप में उतना ही खामियाजा भुगतेंगे।"
मून ने यह बात ऐसे समय में कही है, जब 190 से अधिक देशों के पर्यावरण मंत्री शुक्रवार रात तक किसी वैश्विक समझौते पर पहुंचने के मकसद से कानकुन में जुटे हुए हैं। यह समझौता ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को घटा सकता है और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते दुष्परिणामों से मुकाबला करने में कई सारे देशों की मदद कर सकता है।
कुछ मंत्री अनुमान व्यक्त कर रहे हैं कि शुक्रवार की शाम तक कोई एक समझौता हो जाएगा, लेकिन समझौते के रास्ते में अभी भी कई गतिरोध हैं। दरअसल, क्योटो संधि को बढ़ाए जाने का प्रश्न बड़े विवादों में शामिल है। क्योटो संधि एक ऐसी संधि है, जो औद्योगिक देशों के उत्सर्जन पर रोक लगाती है, साथ ही यह बताता है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भविष्य में किस तरह की वैश्विक कार्यपद्धति अपनाई जानी चाहिए।
मंत्रियों और पर्यावरणवादी कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि दिसम्बर 2009 में कोपेनहेगन की भारी विफलता के बाद कम से कम कानकुन में कोई ठोस प्रगति हाथ लग जाएगी।
बान ने मंगलवार को बाद में संवाददाताओं को बताया था, "यहां ऊंची आकांक्षा है, बहुत ऊंची आकांक्षा भी हो सकती है। कानकुन में इस वर्ष मैं सोचता हूं कि हमें थोड़ा व्यावहारिक और वास्तविक होने की जरूरत है।"
मून ने कहा कि यहां किसी नई वैश्विक संधि की उम्मीद तो नहीं है, लेकिन यहां अन्य कई मुद्दे भी स्वीकृति के लिए पड़े हुए हैं। इनमें जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के खिलाफ गरीब देशों के रक्षा कवच को मजबूत करने के लिए वनों का क्षरण रोकने, प्रौद्योगिकी सहयोग व कार्यक्रम में सुधार की नई कार्यपद्धतियां शामिल हैं। विभिन्न देशों के मंत्री गरीब देशों के जलवायु सहयोग के लिए एक हरित कोष भी स्थापित कर सकते हैं।
मेक्सिको के राष्ट्रपति फेलिप काल्डेरॉन ने उपस्थित जनसमूह को सम्बोधित करते हुए कहा, "सम्मेलन के लिए महत्वपूर्ण उल्टी गिनती शुरू हो रही है।" उन्होंने मंत्रियों से जलवायु परिवर्तन की लड़ाई के लिए एक नए रास्ता तलाशने का आह्वान किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications