भारत में कदम रखते ही हमने सुरक्षित महसूस किया : जर्मन यात्री
मायाभूषण नागवेंकर
पणजी, 8 दिसम्बर (आईएएनएस)। उसने एक फॉक्सवैगन बुली में सवार होकर हैम्बर्ग से गोवा तक की लम्बी यात्रा तय की है, ठीक उसी रास्ते पर चलकर, जिससे होकर पहली बार जर्मन हिप्पी 60 साल पहले यहां पहुंचे थे। पेशे से शिक्षक और उत्साही यात्री नील्स मेल्वेस का कहना है कि ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान जैसे देशों को पार करने के बाद जब उन्होंने भारत में कदम रखा तो खुद को सुरक्षित महसूस किया।
नील्स बुधवार को शुरू हुए भारत-जर्मन मैत्री सप्ताह का आकर्षण बन गए हैं। उन्होंने कहा कि जर्मनी से स्विटजरलैंड, इटली, ग्रीस, तुर्की, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से सड़क मार्ग से गुजरते हुए ईरान एक ऐसा स्थान था, जहां उन्होंने महसूस किया कि दुनिया पूरी तरह पुरुषों में बदल गई है और वास्तविकता मिट गई है।
नील्स ने कहा, "ईरान से गुजरते हुए एक उजड़े और पिछड़े देश जैसा अनुभव हुआ। वहां सड़कों पर एक भी महिला नहीं दिखाई दी। यह एक बहुत ही दमनकारी तरीके की कृतिमता थी।"
यूरोप से एशिया की इस यात्रा में उन्हें पांच सप्ताह लगे। उनके साथ उनकी पत्नी अंका, बेटी माया(5) व फ्लोरियन सूर्या (3) भी थीं। फ्लोरियन सूर्या संयोगवश इसके पहले की यात्रा के दौरान गोवा में ही पैदा हुई थी।
नील्स ने कहा, "मैंने ईरान में सुरक्षित नहीं महसूस किया। जब हम अफगानिस्तान से गुजर रहे थे तो हमारी सुरक्षा में एक हथियारबंद वाहन हमारे साथ था। लेकिन जब हमने पाकिस्तान में कदम रखा तो हम खुश थे। इसके अलावा ईरान के ड्राइवर भारत की तुलना में बहुत बुरे हैं। वे उत्साही हैं। दुनिया में सबसे अधिक उत्साही।"
नील्स ने आईएएनएस को बताया, "यात्रा के दौरान कोई घटना नहीं घटी। न तो हमें तालिबान ने पकड़ा और न तो किसी अन्य ने ही, लेकिन जब हमने भारत में कदम रखा तो राहत की सांस ली। हमने एक दमनकारी महौल वाले क्षेत्र से होते हुए एक ऐसे देश में कदम रखा, जहां डरने जैसी कोई चीज नहीं है। जब हमने वाघा सीमा पर भारत में कदम रखा तो अपने को आजाद महसूस किया। यह भारत का जादू है।"
यहां से 15 किलोमीटर दूर तटीय उत्तरी गोवा के एक प्रसिद्ध गांव अंजुना में आज के 60 साल पहले जब पहली बार जर्मन हिप्पियों ने कदम रखा था तो वे भी बुली में ही सवार होकर आए थे। नील्स, इंडो-जर्मन फ्रेंडशिप सोसायटी गोवा (आईजीएफएसजी) के साथ मिलकर अपनी यात्रा के दौरान उतारे गए छाया चित्रों की प्रदर्शनी लगाएंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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