अफगानिस्तान को हरित क्रांति के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी की दरकार
चंडीगढ़, 8 दिसम्बर (आईएएनएस)। अफगानिस्तान के किसान और कृषि विशेषज्ञ अफगानिस्तान में हरित क्रांति लाने के लिए भारतीय कृषि उद्यमियों और यहां की प्रौद्योगिकी का उपयोग करना चाहते हैं।
काबुल के बादाम बाग फार्म के प्रबंधक खलीउल्लाह स्तानेक्जाई ने आईएएनएस से कहा कि वे भारतीय किसानों को अगले साल काबुल में होने वाले 'इंटरनेशनल एगफेयर 2011' में आमंत्रित करते हैं। भारत ने कृषि को उद्योग बना दिया है। अफगानिस्तान में भी वे भारतीय किसानों और कृषि उद्यमियों की मदद से ऐसा ही करना चाहते हैं।
स्तानेक्जाई अफगानिस्तान के कृषिमंत्री मोहम्मद असिफ रहीमी की अगुवाई में किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां 'एग्रो टेक 2010' में हिस्सा लेने आए थे। इसका आयोजन तीन से छह दिसंबर तक भारतीय उद्योग परिसंघ ने किया था।
स्तानेक्जाई ने कहा कि इस मेले में उन्हें खास तौर से ग्रीन हाउस प्रौद्योगिकी की जानकारी मिली, जो सब्जियों के उत्पादन में काफी कारगर है। अफगानिस्तान में आमतौर पर तापमान काफी कम होता है, इसलिए यह प्रौद्योगिकी वहां काफी उपयोगी होगी।
अफगानिस्तान के एक किसान संगठन के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह ने कहा कि फिलहाल अफगानिस्तान अखरोट, चेरी, खुबानी, किशमिश, फल आदि का निर्यात करता है। पर कृषि में प्रौद्योगिकी का यहां बिल्कुल इस्तेमाल नहीं होता है। वे प्राथमिक कृषि उत्पाद की जगह प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थो का निर्यात बढ़ाना चाहते हैं।
अफगानिस्तान के एक अधिकारी ने कहा कि अफगानिस्तान की कुल 80 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में से 18 लाख हेक्टेयर भूमि पर ही अभी खेती होती है। इसलिए कृषि उद्यमियों के लिए वहां काम करने के बेशुमार अवसर हैं।
अफगानिस्तान में अगले एक साल में 10,000 किसानों और कृषि विशेषज्ञों की जरूरत होगी। सरकार वहां 90 साल के अनुबंध पर नए उद्यमियों को भूमि दे रही है।
एग्रोटेक में भारतीय और अफगानी किसानों के बीच बातचीत का भी एक सत्र आयोजित किया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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