विकिलीक्स खुलासा : मुशर्रफ की सम्मानजनक विदाई में जरदारी, कयानी का योगदान
'डॉन न्यूज' के अनुसार इस्लामाबाद में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत ऐन डब्ल्यू.पैटर्सन द्वारा लिखे गए दो अलग-अलग संदेशों में इस बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है कि नए सेना प्रमुख जनरल कयानी और नई नेशनल असेम्बली में पीपीपी नेता जरदारी ने किस तरह से मुशर्रफ से बड़े ही व्यवस्थित तरीके से दूरियां बनानी शुरू की थी।
अमेरिकी एडमिरल माइक मुलेन के लिए, 2008 के प्रारम्भ में हुए उनके पाकिस्तान दौरे के दौरान, तैयार किए गए संक्षिप्त नोट और बातचीत के बिंदुओं में पैटर्सन ने कहा है, "उम्मीद के अनुरूप जनरल कयानी अब राष्ट्रपति मुशर्रफ से सेना को दूर रखने के लिए धीमा मगर जानबूझ कर कदम उठा रहे हैं।"
पैटर्सन ने लिखा था कि कयानी ने घोषणा की है कि सेना के किसी भी जनरल को राष्ट्रपति से मिलने के लिए उनकी अनुमति लेनी होगी। यह कदम जाहिर तौर से पूर्व सैन्य शासक को अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए समर्थन जुटाने से रोकने को लक्षित था।
मई 2008 में अमेरिकी प्रतिनिधियों, एडम स्किफ और एलिसन स्क्वोर्ट्ज की जरदारी के साथ हुई मुलाकात के बारे में एक अन्य संदेश में पैटर्सन ने इस बात का विवरण दिया है कि जरदारी ने किस तरह से मुशर्रफ की सम्मानजनक विदाई की वकालत की थी।
संदेश के अनुसार, "जरदारी ने मुशर्रफ पर पाकिस्तान में आतंक के खिलाफ युद्ध की पर्याप्त जिम्मेदारी न लेने का आरोप लगाया था।" जिसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान में अमेरिका विरोधी भावना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
संदेश में कहा गया है, "पुराने चेहरों के दूर हो जाने के बाद अमेरिका विरोधी भावना दूर हो जाएगी।" संदेश में आगे कहा गया है कि अमेरिकी सरकार को आतंकवाद से लड़ने के मामले में मुशर्रफ पर अधिक समय तक भरोसा नहीं करना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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