शीर्ष कानून अधिकारी निलम्बित

न्यायमूर्ति एफ. एम. इब्राहिम खलीफुल्ला और न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश की खंडपीठ ने बार काउंसिल के पद से आर. के. चंद्रमोहन को तुरंत निलम्बित करने का आदेश दिया।

खंडपीठ जी. राजेंद्रन की एक याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिसमें अदालत से चंद्रमोहन के खिलाफ अदालत की अवमानना करने के जुर्म में कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया था।

खंडपीठ ने यह भी कहा कि चूंकि चंद्रमोहन पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से अनुशासनात्मक कार्रवाई विचाराधीन है, ऐसी स्थिति में उन्हें अध्यक्ष पद पर बने रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

न्यायाधीश उस समय सी. कृष्णमूर्ति और क्रिबा श्रीधर के जमानत आवेदन की सुनवाई कर रहे थे, जो अंक प्रमाण पत्र के साथ छेड़छाड़ करने के मामले में आरोपी हैं।

पिछले साल न्यायमूर्ति रघुपति ने बीच अदालत में कहा था कि एक पूर्व केंद्रीय मंत्री ने दो लोगों को जमानत देने के लिए उन पर दबाव बनाने की कोशिश की थी। दोनों व्यक्तियों के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो छानबीन कर रही थी।

इस घटना के बारे में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के. जी. बालाकृष्णन को उन्होंने लिखा था कि चंद्रमोहन 12 जून, 2009 को दोपहर दो बजे उनके पास आया था।

उसने जमानत याचिका का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों आरोपी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम नेता और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री राजा के नजदीकी हैं।

उसके बाद उसने न्यायाधीश के हाथ में मोबाइल फोन देकर कहा कि मंत्री उनसे बात करना चाहते हैं।

न्यायाधीश ने पत्र में लिखा कि उन्होंने उन्हें हतोत्साहित करते हुए कहा कि यदि उनके पास मामला आएगा, तो वे कानून सम्मत तरीके से ही उसका निपटारा करेंगे।

राजा ने हालांकि ऐसा करने से इंकार करते हुए टाइम्स नाउ टीवी चैनल से कहा है कि "मैं एक एक ईमानदार आदमी हूं"।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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