छत्तीसगढ़ विधानसभा से 36 सदस्य निलम्बित (लीड-1)
नारे लगाते हुए विधायक सदन के गर्भगृह में पहुंच गए और राज्यभर में बच्चों के अपहरण व हत्या के मामलों के चलते मुख्यमंत्री रमन सिंह के इस्तीफे की मांग करने लगे। इस पर विधानसभा अध्यक्ष धर्मलाल कौशिक ने कांग्रेस के 34 व बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के दो विधायकों के निलम्बन की घोषणा कर दी।
निलम्बित सदस्यों में विपक्ष के नेता रवींद्र चौबे व पूर्व गृह मंत्री नंदकुमार पटेल शामिल हैं।
नब्बे सदस्यीय विधानसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई थी। कांग्रेस व बसपा के सदस्यों ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर अपहरण रोकने में नाकामयाब रहने का आरोप लगाया। सदस्यों के हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।
जब कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तब मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी के चलते सदन को पहले 12 बजे तक और फिर दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया।
वैसे विधानसभा अध्यक्ष का कहना है कि यह निलम्बन सिर्फ मंगलवार के लिए था लेकिन 39 सदस्यों वाली कांग्रेस ने घोषणा की है कि वह पूरे शीतकालीन सत्र में कार्यवाही नहीं चलने देगी। विधानसभा का शीतकालीन सत्र 10 दिसम्बर तक चलेगा।
इस बीच एक ओर रमन सिंह ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा कि उनकी सरकार कानून-व्यवस्था लचर होने के आरोपों पर सदन में चर्चा कराने के पक्ष में है। कार्यवाही में व्यवधान पहुंचाने से किसी को कोई फायदा नहीं होगा।
दूसरी ओर विपक्ष के नेता रवींद्र चौबे ने मुख्यमंत्री के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। उन्होंने कहा, "भाजपा सरकार कानून-व्यवस्था कायम रखने में नाकाम रही है इसलिए जब तक रमन सिंह इस्तीफा नहीं देंगे तब तक कांग्रेस सदन की कार्यवाही नहीं चलने देगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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