जलवायु परिवर्तन वार्ता में हिस्सेदारी का मुद्दा अहम : रमेश
कानकुन में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के दौरान भारत की ओर से आयोजित एक समारोह में कार्बन क्षेत्र में हिस्सेदारी और हिस्सेदारी पर पहुंच के मुद्दे पर जोर दिया गया।
रमेश ने अपने बयान में कहा, "टिकाऊ विकास में हिस्सेदारी का मुद्दा किसी भी जलवायु परिवर्तन समझौते की नींव होगा। हिस्सेदारी में पहुंच का अर्थ प्रदूषण का अधिकार नहीं है बल्कि इसका अर्थ टिकाऊ विकास का अधिकार है।"
रमेश ने कहा कि विकासशील देशों को विकास दर को तेज बनाए रखना जरूरी है और वह विकास में बाधा पहुंचाने वाली किसी भी प्रतिबद्धता को स्वीकार नहीं कर सकते।
विकसित देशों को विश्व के पर्यावरण में 65 प्रतिशत कार्बन डाइ ऑक्साइड छोड़ने के लिए जिम्मेदार बताते हुए टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (टीआईएसएस) के टी. जयरामन ने कहा कि औद्योगिक देशों को कार्बन उत्सर्जन में तेजी से कमी करने की जरूरत है।
कानकुन में 28 नवम्बर से शुरू हुई जलवायु परिवर्तन वार्ता 18 दिसम्बर तक चलेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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