यूनियन कार्बाइड-डॉव कैमिकल्स का विलय समझौता तलब
मालूम हो कि यूनियन कार्बाइड संयंत्र से रिसी जहरीली गैस ने दो-तीन दिसंबर 1984 की रात को हजारों लोगों को अपना शिकार बनाया था। तभी से हजारों टन रासायनिक कचरा संयंत्र परिसर में पड़ा हुआ है। यूनियन कार्बाइड को फरवरी 2001 में डॉव कैमिकल्स में समाहित करने के लिए कम्पनियों के बीच विलय समझौता हुआ था।
रासायनिक कचरे को हटाने के लिए वर्ष 2004 में आलोक प्रताप सिंह ने उच्च न्यायालय जबलपुर में जनहित याचिका दायर की थी। इस याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह यूनियन कार्बाइड और डॉव कैमिकल्स के बीच हुए विलय समझौते की प्रति प्रस्तुत करे।
याचिकाकर्ता आलेाक प्रताप सिंह ने आईएएनएस को बताया है कि विलय समझौते में इस बात का उल्लेख होगा कि यूनियन कार्बाइड का डॉव कैमिकल्स में विलय किए जाने के बाद संयंत्र से जुड़ी तमाम जिम्मेदारियां किसे पूरी करनी हैं। उन्होंने बताया कि एक कम्पनी को दूसरी कम्पनी में समाहित किए जाने पर जवाबदेही व जिम्मेदारियां भी तय की जाती हैं। ऐसा कंपनी अधिनियम में प्रावधान है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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