बैक्टीरिया का भोजन बन रहा है टाइटैनिक

अपने समय का सबसे बड़ा यात्री जहाज रहा टाइटैनिक इंग्लैंड से न्यूयार्क की अपनी यात्रा के दौरान 14 अप्रैल, 1912 को अटलांटिक महासागर में एक हिमशैल से टकराने के बाद डूब गया था। उस वक्त जहाज पर 2223 यात्री सवार थे, इनमें से केवल 706 यात्री ही जीवित बच सके थे।

डलहौजी विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग की प्रोफेसर हेनरीटा मान का कहना है कि बैक्टीरिया की नई प्रजाति मलबे को तेजी से खा रही है, जिससे समुद्र तल में टाइटैनिक जल्दी ही जंग लगे लोहे में परिवर्तित हो जाएगा।

उन्होंने सोमवार को कहा, "यदि हमें 15-20 साल का समय और मिले, तो हम अच्छा कर रहे हैं..अंत में वहां कुछ नहीं बचेगा।"

उन्होंने कहा, "वर्ष 1995 में अनुमान लगाया गया था कि टाइटैनिक के मलबे को पूरी तरह समाप्त होने में 30 साल का और समय लगेगा, लेकिन मुझे लगता है कि अब यह ज्यादा तेजी से विघटित हो रहा है।"

शोधकर्ताओं ने डीएनए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुए टाइटैनिक के मलबे पर लगी जंग का कुछ नमूना इकट्ठा कर उसमें बैक्टीरिया की नई प्रजाति की पहचान की।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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