थॉमस की नियुक्ति पर केंद्र को सर्वोच्च न्यायालय का नोटिस (लीड-1)
न्यायालय इस मामले की अगली सुनवाई एक माह बाद 27 जनवरी को करेगा। सभी पक्षों से कहा गया है कि वे अगली सुनवाई से हलफनामा और जवाब दावा सम्बंधी औपचारिकाताएं पूरी कर लें।
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस.एच. कपाडिया, न्यायमूर्ति के.एस. राधाकृष्णन एवं न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की खंडपीठ ने कहा, "हम सीवीसी थॉमस से यह नहीं सुनना चाहते कि हलफनामा तैयार करने का समय नहीं मिला।"
थॉमस की नियुक्ति को चुनौती देने वाली यह याचिका एक स्वयंसेवी संस्था लोकहित अभियोग केंद्र (सीपीआईएल) द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने नोटिस हाथों-हाथ सौंपने की पेशकश की।
सीवीसी नियुक्ति को चुनौती देने का एक आधार यह है कि लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज की कड़ी आपत्ति के बावजूद थॉमस को नियुक्त किया गया।
याचिका में कहा गया है कि ऐसे संवेदनशील पद पर नियुक्ति चयन समिति के सदस्यों की आमराय और सर्वसम्मति के सिद्धांत की अवहेलना कर की गई।
प्रशांत भूषण ने कहा कि थॉमस हालांकि 2जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस के आवंटन में प्रत्यक्ष रूप से जवाबदेह नहीं हैं। आवंटन प्रक्रिया को न्यायसंगत दिखाने के लिए कानून मंत्रालय से रिपोर्ट हासिल करने में उनका उपयोग किया गया।
याचिकाकर्ता ने कहा कि थॉमस के खिलाफ केरल में वर्ष 1992 में नागरिक आपूर्ति सचिव रहते समय ताड़ के तेल के आयात में हुए घोटाले में आरोप पत्र दाखिल हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक निजी कंपनी की तरफदारी की थी।
सीवीसी बनने से पहले थॉमस दूरसंचार सचिव थे। पिछले दिनों 2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन घोटाले की जांच की निगरानी से थॉमस को अलग रखने का फैसला किया गया था। विपक्ष थॉमस के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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