थॉमस का सीवीसी बने रहने का कोई औचित्य नहीं : भाजपा
उन्होंने कहा कि लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने नियुक्ति के लिए उत्तरदायी समिति की सदस्य होने के नाते थॉमस की नियुक्ति का विरोध किया था, जिसे अनसुना कर दिया गया। एक ऐसा व्यक्ति, जिसके खिलाफ कई आपराधिक मामले विचाराधीन हैं, उसे सीवीसी पर के लिए कतई उपयुक्त नहीं माना जा सकता।
अहलूवालिया ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "दूरसंचार सचिव रहते हुए थॉमस उस 2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन घोटाले पर पर्दा डाले रहे, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है।"
उन्होंने कहा कि थॉमस के खिलाफ केरल में नागरिक आपूर्ति सचिव रहते समय ताड़ के तेल के आयात में हुए घोटाले में आरोप पत्र दाखिल है। इसके अलावा उन्होंने 2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन घोटाले पर पर्दा डालने की पूरी कोशिश की, लेकिन ये सब बातें नियुक्ति के लिए उत्तरदायी समिति के समक्ष नहीं लाई गईं। यही वजह है कि थॉमस की नियुक्ति में खास अड़चन नहीं आई।
अहलूवालिया ने कहा, "लेकिन सवाल यह उठता है कि आरोप सामने आने के बावजूद उनके सीवीसी पद पर बने रहने का क्या औचित्य है? वह सरकार के महत्वपूर्ण अधिकारियों के साथ गुप्त बैठकें किस लिए कर रहे हैं? उनके इस्तीफ देने से इंकार करने और सरकार द्वारा उनका बचाव करने की वजह से ही सरकार और विपक्ष में टकराव की स्थिति पैदा हुई है।"
उन्होंने कहा कि सीवीसी की नियुक्ति के मामले में न्यायिक हस्तक्षेप होना चाहिए और किसी स्वच्छ छवि वाले व्यक्ति को इस पद पर बिठाना चाहिए, जो पद की गरिमा कायम रख सके।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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