बाजार तय करे हवाई किराया, नियामक नहीं : माल्या
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (फिक्की) के एक कार्यक्रम में संवाददाताओं से माल्या ने कहा कि एक उदारवादी माहौल में सीमा लगाने का सवाल ही पैदा नहीं होता है। किराया तो मांग और पूर्ति से निर्धारित होता है।
अधिकारी बताते हैं कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के हस्तक्षेप करने के बाद हवाई किराये में 20-25 फीसदी तक कमी आई है। नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल और डीजीसीए ने पिछले दिनों एयरलाइंस को अत्यधिक ऊंचा किराया कम करने के लिए चेतावनी जारी की थी।
शनिवार को नागरिक उड्डयन महानिदेशक ई. के. भारत भूषण ने इस मुद्दे पर सस्ते एयरलाइंस स्पाइसजेट, इंडिगो और गोएयर के साथ एक बैठक की थी। इस सप्ताह सभी सेवाओं वाले एयरलाइंस एयर इंडिया, जेट एयरवेज और किंगफिशर एयरलाइंस के साथ बैठक की जाएगी।
अभी दिल्ली-मुम्बई मार्ग पर किफायती श्रेणी में हवाई किराया 5,000 रुपये से 20,000 रुपये के बीच है। दिल्ली-चेन्नई और दिल्ली-कोलकाता मार्ग पर यह 5,000 रुपये से 15,000 रुपये के बीच है।
दीपावली के बाद खास तौर से दिल्ली-मुम्बई मार्ग पर अंतिम समय टिकट बुक कराने पर किराए की दर में अत्यधिक बढ़ोतरी हो गई है। दो सप्ताह पहले दिल्ली-मुम्बई मार्ग पर अंतिम समय कटाए गए टिकट के लिए सबसे कम 17,000 रुपया किराया वसूला गया था, जो कि इसी समय में पिछले साल के किराए के मुकाबले करीब पांच गुणा अधिक है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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