भारत-फ्रांस में असैन्य परमाणु सहयोग के क्षेत्र में नए युग का सूत्रपात (लीड-2)
फ्रांस ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए पाकिस्तान से आतंकवादी गुटों और उनके ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा।
भारत की चार दिनों की आधिकारिक यात्रा पर आए सरकोजी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ हैदराबाद हाउस में करीब 90 मिनट तक वार्ता की। दोनों नेताओं के बीच असैन्य परमाणु सहयोग में विस्तार तथा रक्षा, अंतरिक्ष, शिक्षा एवं अनुसंधान में करीबी सम्बंध बनाने पर चर्चा की।
दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुधारों, अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में सुधारों, जी-20 समूह और जलवायु परिवर्तन के बारे में भी चर्चा की।
पांच परमाणु समझौतों के अलावा पृथ्वी विज्ञान और जलवायु परिवर्तन से मुकाबले के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो)और फ्रांस के 'सेंटर नेशनल दात्यूूद स्पेसियाल' के बीच भी समझौता हुआ।
सिंह ने कहा कि दोनों पक्षों ने 2012 तक 12 अरब यूरो का कारोबार करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
10 हजार मेगावॉट बिजली बनाने के लिए अगले कुछ वर्षो में भारत में छह परमाणु संयंत्रों के निर्माण की फ्रांस की दीर्घकालिक योजना पर सरकोजी की यात्रा के दौरान मुख्य रूप से चर्चा हुई।
दोनों पक्षों ने परमाणु से सम्बद्ध पांच समझौतों पर दस्तखत किए। इनमें भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड और अरेवा के बीच महाराष्ट्र के जैतापुर में दो यूरोपीय दबावयुक्त रिएक्टर परमाणु संयंत्रों को स्थापित करने सम्बंधी समझौता शामिल है।
सिंह ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में विचार-विमर्श जैतापुर में भारतीय उद्योग की भागीदारी के साथ परमाणु रिएक्टर लगाने का रास्ता लगाने का मार्ग प्रशस्त करने की अवस्था तक पहुंच चुका है।
अनुसंधान एवं वैज्ञानिकों तथा छात्रों को प्रशिक्षण के प्रशिक्षण, परमाणु सुरक्षा, परमाणु कचरा प्रबंधन और नियामक गतिविधियों के सम्पर्क बढ़ाने के लिए भी कई समझौते हुए।
सरकोजी ने कहा कि फ्रांस भारत में छह परमाणु रिएक्टरों का निर्माण करेगा और उन्होंने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह, प्रक्षेपास्त्र प्रौद्योगिकी नियंत्रण तंत््रर आस्ट्रेलिया समूह और वासेनार समझौता आदि जैसे प्रमुख परमाणु समूहों में भारत की सदस्यता का समर्थन करेगा।
सरकोजी ने कहा, "मैं जब 2008 में भारत आया था तो मैंने कहा था कि भारत की सभी परमाणु मंचों तक पहुंच तथा उनमें सदस्यता मिलनी चाहिए। हम भारत में ग्राहक बनकर नहीं आए बल्कि परमाणु क्षेत्र में भागीदार बनने आए हैं और हमारा सहयोग असीम है। यह सिर्फ छह रिएक्टरों की शुरूआत भर है।"
समझा जाता है कि सरकोजी ने असैन्य परमाणु दायित्व कानून के कुछ पहलुओं पर चिंता जाहिर की है, लकिन आपूर्तिकर्ता के दायित्व का मसला अभी सुलझना बाकी है।
'भविष्य के लिए भारत-फ्रांस भागीदारी'शीर्षक से जारी साझा बयान में कहा गया है, "भारत द्वारा परमाणु दायित्व कानून लागू किए जाने के बाद दोनों देश इस मसले पर पूरी तरह वैचारिक आदान-प्रदान के लिए तैयार हैं ताकि उनके सहयोग के ठोस विकास की उचित रूपरेखा तैयार हो सके।"
प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि परमाणु रिएक्टरों के कुछ तकनीकी एवं मूल्यों से सम्बद्ध मामले सुलझाए जाने बाकी हैं।
दोनों देशों के बीच फिल्म सह-निर्माण के क्षेत्र में सहयोग के लिए भी एक समझौते पर दस्तखत किए गए। इन सभी समझौतों पर हस्ताक्षर प्रधानमंत्री और सरकोजी की उपस्थिति में हुए।
दोनों देशों में बौद्धिक सम्पदा अधिकारों और असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग की अनुमति के लिए गोपनीयता सम्बंधी समझौते पर भी दस्तखत किए गए।
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किए जाने के महज महीना भर बाद सरकोजी ने भी इसके लिए फ्रांस का समर्थन दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत की स्थायी सदस्यता वैश्विक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है।
भारत के एक जनवरी 2011 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य बनने के बारे में पूछे जाने पर सरकोजी ने कहा, "दो वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद हम भारत से हट जाने को कहेंगे।"
उन्होंने अपना पक्ष दोहराते हुए कहा कि एक अरब की आबादी वाले देश को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के शीर्ष दायरे से बाहर रखना अनुचित है। उन्होंने कहा कि स्थायी सदस्यता पाना भारत का हक है।
इससे पहले प्रधानमंत्री ने सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की फ्रांस द्वारा निरंतर पैरवी के लिए सरकोजी का आभार व्यक्त किया।
सरकोजी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के संघर्ष के प्रति भी एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने पाकिस्तान से आतंकवादी गुटों और उनके ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा।
निपटने के विषय में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में कहा, "हम भारत की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हैं। हम पाकिस्तान से अनुरोध करते हैं कि वह आतंकवादियों से दृढ़ता से निपटे।"
उन्होंने कहा कि 2008 के मुम्बई आतंकवादी हमलों के बाद फ्रांस भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहा। इन हमलों में मारे गए 166 लोगों में से दो फ्रांसीसी नागरिक भी थे।
सरकोजी ने कहा, "आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में हमारे समर्थन की कोई सीमा नहीं है।"
सरकोजी ने कहा कि इस जघन्य आतंकवादी हमले से भारतीय जनमत के गहरे सदमे में और खौफजदा होने के बावजूद पाकिस्तान से सम्बंध सुधारने केमनमोहन सिंह के प्रयासों की वह सराहना करते हैं।
उन्होंने कहा, "फ्रांस, भारत की हरसम्भव मदद करेगा। पाकिस्तान को अपने पड़ोसी के साथ शांति से रहना चाहिए। हम पाकिस्तान से आतंकवाद का मुकाबला करने का अनुरोध करते हैं और अफगानिस्तान के बारे में भारत और फ्रांस की राय एक समान है।"
सरकोजी ने कहा कि 21 वीं सदी में शांति और सुरक्षा एकमात्र रास्ता यही है कि एक-दूसरे के खिलाफ नहीं बल्कि एक-दूसरे के साथ बढ़ा जाए। उन्होंने यूरोपीय संघ का उदाहरण दिया जहां पुराने शत्रु आपस में मिलकर कार्य करते हैं।
सरकोजी अपनी यात्रा के अंतिम चरण में मुम्बई यात्रा के दौरान 2008 के आतंकी हमलों का निशाना बने ताज महल होटल और ओबेरॉय ट्राइडेंट भी जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि सरकोजी, पत्नी कार्ला ब्रूनी और एक विशाल शिष्टमंडल के साथ भारत की चार दिन की आधिकारिक यात्रा पर हैं। वह शनिवार को बेंगलुरू पहुंचे और रविवार को आगरा का दौरा करने के बाद वह कल ही दिल्ली पहुंचे थे जहां उनके सम्मान में प्रधानमंत्री ने रात्रिभोज का आयोजन किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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