सरकोजी ने स्थायी सदस्यता का समर्थन किया, कई समझौतों पर हस्ताक्षर (लीड-1)

भारत की चार दिनों की आधिकारिक यात्रा पर आए सरकोजी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ हैदराबाद हाउस में वार्ता के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में अपने शुरुआती वक्तव्य में कहा, "यह सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि विश्व में संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण है।"

भारत के एक जनवरी 2011 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य बनने के बारे में पूछे जाने पर सरकोजी ने कहा, "दो वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद हम भारत से हट जाने को कहेंगे।"

उन्होंने अपना पक्ष दोहराते हुए कहा कि एक अरब की आबादी वाले देश को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के शीर्ष दायरे से बाहर रखना अनुचित है। उन्होंने कहा कि स्थायी सदस्यता पाना भारत का हक है।

सरकोजी ने आतंकवाद से निपटने के विषय में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में कहा, "हम भारत की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हैं। हम पाकिस्तान से अनुरोध करते हैं कि वह आतंकवादियों से दृढ़ता से निपटे।"

इससे पहले प्रधानमंत्री ने सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की फ्रांस द्वारा निरंतर पैरवी के लिए सरकोजी का आभार व्यक्त किया।

शिष्टमंडल स्तरीय वार्ता के बाद दोनों देशों में सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए जिनमें असैन्य परमाणु ऊर्जा पर मुख्य रूप से बल दिया गया।

समझौतों में भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड और अरेवा के बीच महाराष्ट्र के जैतापुर में दो यूरोपीय दबावयुक्त रिएक्टर परमाणु संयंत्रों को स्थापित करने सम्बंधी समझौता शामिल है। प्रधानमंत्री ने कहा कि दाम से सम्बंधित तकनीकी मसले हैं जिन पर विचार किए जाने की जरूरत है।

दोनों देशों के बीच फिल्म सह-निर्माण के क्षेत्र में सहयोग के लिए भी एक समझौते पर दस्तखत किए गए। इन सभी समझौतों पर हस्ताक्षर प्रधानमंत्री और सरकोजी की उपस्थिति में हुए।

दोनों देशों में बौद्धिक सम्पदा अधिकारों और असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग की अनुमति के लिए गोपनीयता सम्बंधी समझौते पर भी दस्तखत किए गए।

पृथ्वी विज्ञान और जलवायु परिवर्तन से मुकाबले के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो)और फ्रांस के 'सेंटर नेशनल दात्यूूद स्पेसियाल' के बीच भी समझौता हुआ।

सिंह ने कहा कि दोनों पक्षों ने 2012 तक 12 अरब यूरो का कारोबार करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

सिंह ने कहा, "हम भारत-फ्रांस के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की भूमिका की सराहना करते हैं। ऊर्जा, जल और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों, तीसरी दुनिया के देशों में संयुक्त उद्यम लगाने में निवेश बढ़ाने की उनकी सिफारिशों और अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में सहयोग की परख की जाएगी।"

सरकोजी ने कहा कि जी-20 देशों का नया प्रमुख होने के नाते वह कमोडिटी मूल्यों और खाद्य सुरक्षा के नियमन में भारत के साथ संयुक्त प्रस्तावों पर फ्रांस चर्चा करग्ेगा।

उन्होंने कहा कि 2008 के मुम्बई आतंकवादी हमलों के बाद फ्रांस भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहा। इन हमलों में मारे गए 166 लोगों में से दो फ्रांसीसी नागरिक भी थे।

सरकोजी ने कहा, "आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में हमारे समर्थन की कोई सीमा नहीं है।"

सरकोजी ने कहा कि इस जघन्य आतंकवादी हमले से भारतीय जनमत के गहरे सदमे में और खौफजदा होने के बावजूद पाकिस्तान से सम्बंध सुधारने केमनमोहन सिंह के प्रयासों की वह सराहना करते हैं।

सरकोजी ने कहा कि 21 वीं सदी में शांति और सुरक्षा एकमात्र रास्ता यही है कि एक-दूसरे के खिलाफ नहीं बल्कि एक-दूसरे के साथ बढ़ा जाए। उन्होंने यूरोपीय संघ का उदाहरण दिया जहां पुराने शत्रु आपस में मिलकर कार्य करते हैं।

सरकोजी ने कहा कि अफगानिस्तान के बारे में भारत और फ्रांस की राय एक समान है।

उल्लेखनीय है कि सरकोजी, पत्नी कार्ला ब्रूनी और एक विशाल शिष्टमंडल के साथ भारत की चार दिन की आधिकारिक यात्रा पर हैं। वह शनिवार को बेंगलुरू पहुंचे और रविवार को आगरा का दौरा करने के बाद वह कल ही दिल्ली पहुंचे थे जहां उनके सम्मान में प्रधानमंत्री ने रात्रिभोज का आयोजन किया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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