पाकिस्तानी सीमा पर युद्ध जीतने को लेकर अमेरिका आशंकित
वाशिंगटन, 6 दिसम्बर (आईएएनएस)। विकिलीक्स द्वारा लीक किए गए अमेरिकी विदेश विभाग के एक संदेश से यह बात उजागर हुई है कि पाकिस्तान स्थित अमेरिकी राजनयिक पाकिस्तान के अशांत इलाकों में सैन्य लड़ाई जीतने को लेकर आशंकित हैं। राजनयिकों ने कहा है कि शांतिवार्ता का कोई अर्थ नहीं है और प्रमुख शहरों पर आतंकियों का नियंत्रण है।
समाचार पत्र 'वाशिंगटन टाइम्स' के अनुसार पेशावर स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास से भेजे गए एक लम्बे संदेश में यह भी कहा गया है कि आठ वर्षो तक चले हवाई हमले, सैन्य निगरानी और बढ़ाई गई जांच चौकियों का अफगानिस्तान से लगी पाकिस्तानी सीमा की सुरक्षा पर कोई असर नहीं हुआ है और इस्लामी आतंकी, तालिबान के साथ संघर्षरत अमेरिकी सैनिकों पर हमला करने के लिए सीमा का बराबर इस्तेमाल करते हैं।
लीक किए गए संदेश में कहा गया है, "सीमाएं असुरक्षित हैं। तालिबान और आतंकी चरमवादी लगातार अफगानिस्तान से लगी सीमा को पार कर रहे हैं और आतंकी व तस्करी की गतिविधियों से जुड़ रहे हैं। दुर्गम इलाका होने के कारण सीमा की निगरानी व उस पर नियंत्रण कर पाना कठिन है।"
'वाशिंगटन टाइम्स' ने सैन्य विश्लेषकों के हवाले से कहा है कि जब तक आतंकी पाकिस्तान से अफगानिस्तान और अफगानिस्तान से पाकिस्तान में मुक्तरूप से आवाजाही करते रहेंगे, तब तक काबुल विरोधी आतंकवाद को पराजित कर पाना कठिन होगा।
संदेश में वाशिंगटन और अमेरिकी कमांडरों को वजीरिस्तान पर नियंत्रण रखने वाले किरदारों के बारे में सूचित किया गया है।
उसमें से मुख्य किरदार, मृत बैतुल्ला महसूद का संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) है, जो पाकिस्तान सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए कटिबद्ध है।
कबायली इलाके का अन्य प्रमुख आतंकी जलालुद्दीन हक्कानी है। हक्कानी अफगान तालिबान नेता मुल्ला मोहम्मद उमर का करीबी सहयोगी है। जलालुद्दीन 'हक्कानी नेटवर्क' नामक एक संगठन का संचालन करता है।
जहां महसूद इस्लामाबाद को निशाना बनाता है, वहीं हक्कानी अफगानिस्तान पर हमले करता है, और समझा जाता है कि उसे पाकिस्तान के इंटर सर्विसेस इंटेलिजेंस (आईएसआई) के कुछ गलत तत्वों का समर्थन प्राप्त है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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