मंदिर-मस्जिद से नहीं होगा कल्याण, बने अस्पताल : शाइस्ता अम्बर
लखनऊ, 5 दिसंबर(आईएएनएस)। आल इंडिया महिला मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष एवं जानी-मानी समाज सेविका शाइस्ता अम्बर का कहना है कि अयोध्या में विवादित जमीन पर मंदिर या मस्जिद बन जाने से मानवता का कोई कल्याण नहीं होगा बल्कि हिंदू और मुस्लिम पक्षों को अपना-अपना दावा छोड़कर वहां एक भव्य अस्पताल का निर्माण करवाना चाहिए, जिससे की मानवता की सेवा हो सके।
अम्बर ने रविवार को आईएएनएस से एक विशेष बातचीत में कहा, "विवादित स्थान पर मंदिर या मस्जिद बनने से मुझे नहीं लगता कि मानवता का कोई कल्याण हो सकेगा। बेहतर होगा कि दोनों पक्ष समझ्झौता करके उस स्थान पर एक अस्पताल बनवाएं, जिसमें गरीबों का मुफ्त इलाज हो सके।"
उन्होंने कहा कि हर धर्म में मानव सेवा और मानव कल्याण को सर्वोपरि रखा गया है। अगर उस स्थान पर एक भव्य अस्पताल का निर्माण होगा तो न जाने कितने गरीबों का भला होगा।
अम्बर के मुताबिक इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद मंदिर और मस्जिद के नाम पर दशकों से चली आ रही कानूनी लड़ाई का एक पड़ाव भले ही समाप्त हो गया हो लेकिन दोनों पक्ष सर्वोच्च अदालत जाएंगे और यह लड़ाई न जाने कितने साल और जारी रहेगी।
उन्होंने कहा कि "मंदिर-मस्जिद की इस लड़ाई में न तो देश का हित हो रहा है और न ही मानवता का। बेवजह विवादित परिसर की सुरक्षा में केवल हर साल करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं।"
मालूम हो कि बीते 30 सितम्बर को एक ऐतिहासिक फैसले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बहुमत से यह व्यवस्था दी थी कि अयोध्या में विवादास्पद स्थल भगवान राम का ही जन्म स्थान है। अदालत ने विवादास्पद भूमि को तीन बराबर हिस्सों में निर्मोही अखाड़ा, सुन्नी वक्फ बोर्ड और रामलला पक्ष को बांटे जाने का भी फैसला सुनाया था।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय का यह फैसला आने के कुछ दिन बाद तीनों पक्षों ने इस फैसले को चुनौती देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने की घोषणा की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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