रघु ठाकुर के काव्य संग्रह 'मैं अभिमन्यु हूं' का विमोचन
देशभर में घूम घूम कर अर्जित राजनैतिक एवं सामाजिक विडम्बनाओं के अनुभवों को काव्य रूप में पेश करने वाली यह रघु ठाकुर की पहली पुस्तक है। इसके पहले देश की राजननीतिक दशा पर उनकी अनके पुस्तकें एवं हजारों लेख प्रकाशित हो चुके हैं।
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में हिन्दी के प्राध्यापक प्रो. त्रिपाठी ने पुस्तक के विमोचन के बाद कहा कि उन्होंने रघुजी के सामाजिक एवं राजनैतिक कार्यकलापों की बड़ी ख्याति सुन रखी थी लेकिन उनके साहित्यकार होने का इल्म नहीं था।
उन्होंने कहा कि अभिमन्यु ऐसा मिथक है जो बहुतों को काल्पनिक भी लगता है लेकिन उसमें एक सार है। इस मिथकीय पात्र के साथ आज के जमाने में न्याय कर पाना काफी मुश्किल काम है। जिस तरह वह अपने ही प्रेरणा पुरूषों से घिरा हुआ था, ठीक उसी प्रकार आज रघुजी देश में दिन प्रतिदिन भ्रष्ट होती जा रही राजनैतिक एवं सामाजिक व्यवस्था और वैचारिक पतन से जूझ रहे हैं।
इस अवसर पर रामचरण सिंह साथी के गजल संग्रह 'कुछ जमीं कुछ आसमां' और सागर के चित्रकार असरार अहमद द्वारा रघु ठाकुर के विचारों पर आधारित चित्रकृति 'शब्द' का भी विमोचन किया गया।
इस अवसर पर प्रख्यात समाजवादी चिंतक मस्तराम कपूर को कार्यक्रम के आयोजक प्रज्ञान शिखर समारोह समिति की ओर से प्रज्ञान शिखर सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि लोहिया का सपना था कि राजनीतिज्ञों की एक टीम ऐसी हो जो सत्ता की ओर देखे बिना ही अपना काम लगातार करती रहे और सत्ताधीशों पर कड़ा नियंत्रण रखे। रघु ठाकुर लोहिया के उसी सपने को पूरा करने वाली टीम के अकेले ही सदस्य हैं।
समारोह के आखिर में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें शायर मंगल नसीम, प्रवीण शुक्ल, रामचरण सिंह साथी, लखमीचंद सुमन आदि कवियों ने अपनी कविताओं का पाठ किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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