फांसी से पहले सिखी धारण करना चाहता है बेअंत सिंह का हत्यारा

चंडीगढ़ की उच्च सुरक्षा वाली बुड़ैल जेल में कैद बलवंत सिंह ने फांसी पर लटकाए जाने से पूर्व अपनी अंतिम इच्छा के रूप में सिखी धारण करने की इच्छा जाहिर की है।

अमृतसर के स्वर्ण मंदिर स्थित सिख धर्म की सर्वोच्च संस्था, अकाल तख्त के जत्थेदार गुरबचन सिंह को पिछले सप्ताह बलवंत सिंह की बहन का पत्र प्राप्त हुआ था। गुरबचन सिंह ने बलवंत सिंह को सिखी धारण कराने के लिए बंदोबस्त करने हेतु शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से कहा है।

बलवंत सिंह ने पत्र में एक अमृतधारी सिख के रूप में मरने की इच्छा जाहिर की है। बलवंत सिंह धर्म से तो सिख है लेकिन उसने सिखी नहीं धारण की है। इसका अर्थ यह होता है कि बलवंत को सिख धर्म की सख्त परम्पराओं का पालन करना आवश्यक नहीं है।

अकाल तख्त के जत्थेदार ने कहा, "हमने एसजीपीसी से कहा है कि इस सम्बंध में तैयारी की जाए। मैं 'पंज पियारस' के साथ जेल जाऊंगा और उसे एक अमृतधारी सिख बनने में मदद करूंगा।"

ज्ञात हो कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत ने पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या की साजिश में बलवंत सिंह को दोषी पाया था।

पंजाब के तेजतर्रार पुलिस अधिकारी के.पी.एस.गिल के साथ मिलकर आतंकवाद को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए चर्चित रहे मुख्यमंत्री (1992-95) बेअंत सिंह की दिलावर सिंह नामक मानव बम ने उच्च सुरक्षा वाले पंजाब सचिवालय में 31 अगस्त, 1995 को हत्या कर दी थी।

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने इस वर्ष अक्टूबर महीने में बलवंत सिंह के मृत्युदंड को जायज ठहराया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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