नेपाल में शांति प्रक्रिया नाजुक मोड़ पर : पास्को
नेपाली समाचार पत्र 'द राइजिंग नेपाल' की वेबसाइट के अनुसार पास्को ने अपने दो दिवसीय दौरे के समापन के मौके पर आश्वस्त किया कि नेपाल से संयुक्त राष्ट्र मिशन की वापसी के बाद भी संयुक्त राष्ट्र अपनी एजेंसियों के जरिए शांति समझौते का लगातार समर्थन करता रहेगा।
पास्को शुक्रवार को यहां पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि शांति प्रक्रिया, संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में होगी और संयुक्त राष्ट्र मिशन की वापसी के बाद भी नेपाल तीन वर्षो तक सुरक्षा परिषद का एजेंडा बना रहेगा।
पास्को ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "इस दौरे में राजनीतिक नेताओं, सरकारी अधिकारियों और कूटनीति से सम्बद्ध लोगों के साथ अच्छी बैठकें हुई हैं। मैं समझता हूं कि यह हम सबके सामने जाहिर है कि नेपाल में शांति प्रक्रिया एक नाजुक काल की ओर बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में यह बहुत जरूरी हो गया है कि नेपाल के नेता एकीकरण व पुनर्वास, सत्ता बंटवारे और नए संविधान की रचना जैसे मुद्दों को सुलझाने के लिए तत्काल पहल करें।"
पास्को ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने नेपाल में शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए बड़ा प्रयास किया। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ, संयुक्त राष्ट्र नेपाल के साथ काम करता रहेगा।
पास्को ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र मिशन 15 जनवरी को नेपाल छोड़ रहा है। ऐसी स्थिति में खासतौर से यह बहुत ही महत्वपूर्ण हो गया है कि माओवादी सेना के एकीकरण और उसके पुनर्वास के मुद्दे पर राजनीतिक सहमति बहुत जल्द बन जानी चाहिए। हमारे जाने में अब छह सप्ताह का समय शेष है और यह बहुत जरूरी है कि संयुक्त राष्ट्र मिशन जब यहां से जाए तो चीजें अपनी जगह व्यवस्थित हो जाएं, ताकि प्रक्रिया सहज रूप में आगे बढ़े।
शांति प्रक्रिया में शामिल राजनीतिक नेताओं सहित विभिन्न घटकों के साथ अपनी चर्चाओं का जिक्र करते हुए पास्को ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रक्रिया के निष्कर्ष के सम्बंध में पार्टियों के बीच व्याप्त मतभेदों को सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा, "लेकिन मैं इस बात को दोहराना चाहूंगा कि समय बहुत कम है और इस काम को पूरा करने के लिए सभी सम्बंधित पक्षों को राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाने की जरूरत है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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