मोबाइल के मोहताज बन रहे हैं किशोर : सर्वेक्षण
भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग संगठन (एसोचैम) द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक अभिभावकों से ज्यादा लाड़-प्यार मिलने, खर्च के लिए ज्यादा पैसा मिलने और निगरानी के अभाव के चलते किशोर-किशोरियों में मोबाइल पर निर्भरता और इसका उपयोग बढ़ रहा है।
'खिलौने से उपकरण तक' शीर्षक से प्रकाशित इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि 15 से 18 साल की उम्र के 88 प्रतिशत किशोर-किशोरियां मोबाइल रखते हैं। इनमें से 16 से 18 साल के 66 प्रतिशत से ज्यादा किशोर-किशोरियां स्कूल में भी अपना मोबाइल ले जाते हैं।
मुम्बई, गोवा, कोचीन, चेन्नई, हैदराबाद, इंदौर, पटना, पुणे, अहमदाबाद, दिल्ली, चण्डीगढ़ और देहरादून में किए गए इस सर्वेक्षण में 2,000 अभिभावकों और 2,500 विद्यार्थियों को शामिल किया गया।
अध्ययन में पाया गया कि बच्चे न सिर्फ बात करने के लिए बल्कि एसएमएस और एमएमएस का भी भारी उपयोग करते हैं।
एसोचैम के महासचिव डी. एस. रावत ने कहा कि स्कूलों में तमाम नीतियों के बावजूद सच्चाई यह है कि दो तिहाई किशोर किशोरियों ने स्वीकार किया है कि वह स्कूल परिसर में भी मोबाइल का उपयोग करते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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