उल्फा के 'मामा' जमानत पर रिहा
गुवाहाटी, 5 दिसम्बर (आईएएनएस)। अलगाववादी नेता और प्रतिबंधित युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के राजनीतिक विचारक, भीमकांत बरगोहैन सात वर्षो के बाद रविवार को गुवाहाटी केंद्रीय कारागार से रिहा हो गए। पिछले छह महीनों के दौरान जेल से रिहा होने वाले उल्फा नेताओं में बरगोहैन पांचवे व्यक्ति हैं।
जमानत पर रिहा होने के तत्काल बाद बरगोहैन ने आईएएनएस को बताया, "मैं जमानत पर रिहा होकर खुश हूं और अब हम सभी की प्राथमिकता यह है कि असम में जारी विवाद को समाप्त करने के लिए राजनीतिक बातचीत शुरू की जाए।"
सभी उल्फा कार्यकर्ताओं और नेताओं में 'मामा' के नाम से चर्चित बरगोहैन को रॉयल भूटान आर्मी ने 'ऑपरेशन आल क्लीयर' के दौरान दिसम्बर 2003 में गिरफ्तार किया था।
उसके बाद उन्हें भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया गया था और वह तभी से असम की विभिन्न जेलों में कैद थे।
बरगोहैन (70) ने कहा, "जेल में कैद अन्य नेताओं के रिहा हो जाने के बाद हम शांति वार्ता के तरीके पर चर्चा कर सकते हैं।"
रविवार तड़के रिहा होने के बाद बरगोहैन अपने पारिवारिक सदस्यों के साथ पूर्वी असम के तिनसुकिया जिले में धोला स्थित अपने पैतृक घर चले गए।
बरगोहैन ने कहा, "आगे की यात्रा कोई आसान नहीं है, क्योंकि हमें भारत द्वारा 63 वर्षो से अधिक समय से किए गए दमन और शोषण का समाधान निकालना है।"
उल्फा के कमांडर इन चीफ, परेश बरुआ को छोड़ कर संगठन का पूरा कुनबा जेल में था। कैद नेताओं में अध्यक्ष अरविंद राजखोवा, उपाध्यक्ष प्रदीप गोगोई, प्रचार प्रमुख मिथिंगा दैमरी, उप कमांडर इन चीफ राजू बरुआ, स्वयंभू विदेश सचिव सशा चौधरी, वित्त सचिव चित्रबन हजारिका, सांस्कृतिक सचिव प्रणति डेका, और भीमकांत बरगोहैन शामिल थे।
शांति वार्ता का मार्ग प्रशस्त करने के लिए उल्फा नेताओं की रिहाई की मांग जब जोर पकड़ने लगी तो सरकार ने अलगाववादी नेताओं की जमानत याचिका का अदालत में विरोध न करने की रणनीति बनाई।
इसके बाद प्रक्रिया शुरू हुई और एक-एक कर उल्फा के पांच नेता जमानत पर रिहा हो गए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications