बाघिनों की कान्हा से पन्ना रवानगी टली
देश में दूसरे सरिस्का के नाम से पहचान बना चुके पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में बाघों को दूसरे उद्यानों से लाने का अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से दो बाघिनों को सड़क मार्ग के जरिए पांच और छह दिसम्बर की रात को लाया जाना था। पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में नए मेहमानों की तमाम तैयारियां पूरी की जा चुकी थीं लेकिन कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से खबर आई कि फिलहाल इस अभियान को टाल दिया गया है।
पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के उप संचालक विक्रम सिंह परिहार ने रविवार को आईएएनएस को बताया है कि तकनीकी कारणों के चलते बाघिनों को लाने का अभियान कुछ दिनों के लिए टाल दिया गया है। दोनों बाघिनों को सड़क मार्ग से पन्ना लाया जाना था।
वन विभाग के सूत्रों का कहना है कि देश में यह पहला प्रयोग है जब मानव संपर्क में रहने वाली बाघिनों को खुले जंगल में छोड़े जाने की योजना है। जिन दो बाघिनों को पन्ना राष्ट्रीय उद्यान लाया जाना प्रस्तावित है, वे अनाथ है और पिछले पांच वर्षो से बाड़े में रह रही हैं। यह दोनों बाघिन पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में रहने वाले बाघों व बाघिनों से परिचित हो सकें इसके लिए पन्ना से कान्हा पिछले कुछ दिनों से उनका मल-मूत्र भेजा जा रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि स्थानांतरित बाघिनों को पन्ना पहुंचने पर नए पन का अहसास न हो। इतना ही नहीं बाघिनों को शिकार सिखाने के लिए चीतल आदि अन्य जानवरों को उनके बाड़े में छोड़ा जाता है।
मालूम हो कि पिछले साल भी बांधवगढ़ और कान्हा से एक-एक बाघिन को पन्ना राष्ट्रीय उद्यान लाया गया था। इनमें से एक बाघिन ने चार शावकों को जन्म दिया था लेकिन चार में से दो शावक लापता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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