आंध्र में मंत्री अभी भी महत्वपूर्ण विभागों की प्रतीक्षा में
हैदराबाद, 3 दिसम्बर (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश मंत्रिमंडल में गतिरोध शुक्रवार को भी जारी रहा। अपने विभागों से असुंतष्ट मंत्रियों ने कार्यभार ग्रहण करने से इंकार कर दिया है। नाराज मंत्री प्रतीक्षा में हैं कि मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी उनकी शिकायतों का समाधान करेंगे।
विभागों के बंटवारे पर कड़ा असंतोष जताने के एक दिन बाद आठ वरिष्ठ मंत्रियों ने राज्य सचिवालय से दूरी बनाए रखी।
उधर, बुधवार रात मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले वट्टी सनथ कुमार गुरुवार को हुई मंत्रिमंडल की पहली बैठक से दूर रहे, लेकिन अपनी दिल्ली यात्रा के बाद उन्होंने संकेत दिया है कि वह अपना इस्तीफा वापस ले सकते हैं।
बुधवार को शपथ लेने वाले 39 मंत्रियों में से केवल 10 मंत्रियों ने विभागों की जिम्मेदारी संभाली है।
वहीं, वरिष्ठ मंत्रियों धर्मणा प्रसाद राव (सड़क एवं परिवहन), बोत्सा सत्यनारायण (परिवहन), पोन्नला लक्ष्मैया (सूचना प्रोद्यौगिकी), जे. कृष्णा राव (धर्मार्थ), कन्ना लक्ष्मीनारायण (आवास) और दामोदर राजनरसिम्हा (उच्च शिक्षा) ने अपने विभागों का कार्यभार ग्रहण नहीं किया है।
मंत्रियों के करीबी सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा मंत्रालय में फेरदबल करने के बाद ही ये मंत्री अपने विभागों की जिम्मेदारी संभालेंगे। मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल की बैठक में विभागों के दोबारा आवंटन का आश्वासन दिया था।
उधर, मुख्यमंत्री किरण कुमार कथित रूप से उप मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और पार्टी के राज्य अध्यक्ष पदों पर कांग्रेस नेतृत्व द्वारा की जाने वाली नियुक्तियों की प्रतीक्षा में हैं। इसके बाद ही वह विभागों का बंटवारा दोबारा करेंगे।
उल्लेखनीय है कि उप मुख्यमंत्री के पद पर किसी नाम की घोषणा न करने पर दामोदर राजानरसिम्हा और दलित विधायकों के एक समूह ने गुरुवार को मुख्यमंत्री के खिलाफ प्रदर्शन किया।
विभागों के बंटवारे से नाराज अन्य मंत्रियों ने शिकायत की है कि 11 महत्वपूर्ण विभागों में से आठ विभागों को रेड्डी समुदाय के मंत्रियों को दिया गया है। वे विभागों में सभी समुदायों का प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं।
रेड्डी समुदाय के मंत्रियों को वित्त, गृह, सिंचाई, पंचायत राज, निगम प्रशासन, स्वास्थ्य एवं ऊर्जा मंत्रालय दिया गया है, जबकि इसके पहले के मंत्रिमंडल में रेड्डी समुदाय के केवल चार मंत्रियों को महत्वपूर्ण विभाग दिया गया था।
जी. कुटुलाहम्मा ने पत्रकारों को बताया, "दलित नेता होने के नाते मुझे मंत्री नहीं बनाया गया है और मेरे पास पैसे की ताकत भी नहीं है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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