विकिलीक्स खुलासा : श्रीलंका पर लंदन के रुख का कारण तमिल मतदाता
समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक विकीलीक्स द्वारा सामने लाई गई सामग्री में बताया गया है कि ब्रिटेन में करीब तीन लाख तमिल रहते हैं।
ब्रिटेन में अमेरिकी दूतावास से भेजे गए एक कूटनीतिक संदेश में कहा गया है कि ब्रिटेन में आगामी चुनाव और लेबर पार्टी के नेताओं के चुनाव क्षेत्र में तमिल मतदाताओं की प्रचुर संख्या के कारण सरकार तमिल मुद्दे पर विशेष ध्यान दे रही है।
श्रीलंका सेना द्वारा 2009 की शुरुआत में तमिल टाइगरों पर निर्णायक हमला करने पर मानवाधिकार संगठनों ने श्रीलंका में मानवाधिकार उल्लंघन का मसला उठाया था। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान था कि इस दौरान हजारों आम नागरिक भी मारे गए होंगे।
उधर एक अन्य संदेशों से श्रीलंका में अमेरिकी कूटनीतिकों की चिंता का पता चलता है। इसमें कहा गया है कि श्रीलंका पर लग रहे अधिकतर आरोपों के लिए नागरिक और सैन्य नेतृत्व जिम्मेदार हैं, जिसमें राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे, उनके भाई और विपक्षी उम्मीदवार सारथ फोंसेका शामिल हैं।
ब्रिटेन की ओर से तमिल नागरिकों को मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए और हिंसा समाप्त करने के लिए श्रीलंका सरकार पर दबाव डालने की काफी कोशिश की गई।
पश्चिमी सरकार की ओर से जहां श्रीलंका सरकार को संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार परिषद में घसीटा गया, वहीं विकासशील देशों ने पूर्व औपनिवेशक ताकत ब्रिटेन के खिलाफ श्रीलंका का साथ दिया। परिषद ने आखिरकार श्रीलंका सरकार के पक्ष में ही फैसला दिया।
विकीलीक्स के कूटनीतिक संदेशों में श्रीलंका के तमिलों और विदेशी तमिलों की राय में फर्क का पता चलता है। श्रीलंका के तमिल नागरिक जहां मानवाधिकार की जिम्मेदारी को लेकर कम संजीदा दिखते हैं, वहीं विदेशों में रहने वाले तमिलों के लिए यह मसला प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है।
इसमें कहा गया है कि श्रीलंका में रहने वाले तमिलों को मानवाधिकार का मसला उठाने पर उन पर राजनीतिक या व्यक्तिगत हमले का डर है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications