सरकोजी ने संयुक्त राष्ट्र, एनएसजी के लिए किया भारत का समर्थन (लीड-4)
करीब महीना भर पहले ही अमेरिका ने परमाणु अप्रसार समूहों में शामिल होने के भारत के प्रयास का समर्थन किया था।
सरकोजी ने एक साक्षात्कार में भी कहा कि सोमवार को नई दिल्ली में सोमवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ आधिकारिक वार्ता के दौरान वह असैनिक परमाणु उत्तरदायित्व कानून से जुड़े मुद्दों को उठाएंगे।
45 देशों के समूह एनएसजी में सदस्यता की भारत की दावेदारी का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि अब भारत के लिए यह व्यावहारिक होगा कि वह एनएसजी के साथ शुरुआत करते हुए उन बहुपक्षीय निकायों के कार्यो में पूरी तरह हिस्सेदार बने, जो परमाणु अप्रसार प्रणाली के मसौदे और अनुपालन के लिए उत्तरदायी हैं। उन्होंने कहा, "फ्रांस भारत की ऐसे समूहों में सदस्यता के पक्ष में है।"
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) स्थित उपग्रह केंद्र में सरकोजी ने कहा, "फ्रांस पहला ऐसा देश है जिसने 1998 में भारत को परमाणु के मामलों से अलग-थलग करने का विरोध किया था। भारत जैसे देश को उसके असैनिक परमाणु क्षेत्र के विकास से रोकना हास्यास्पद है।"
सरकोजी ने कहा, "फ्रांस, अमेरिका, रूस और इंग्लैंड भारत के साथ समझौते पर पहले ही हस्ताक्षर कर चुके हैं। इसमें अन्य देश भी जल्द ही शामिल होंगे।"
सरकोजी ने कहा कि परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी से दोनों देशों के बीच वर्षो पुरानी सहभागिता को बल मिलेगा।
फ्रांस के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे का समर्थन किया। साथ ही उन्होंने भारत का परमाणु अलगाव समाप्त करने का भी आह्वान किया।
इसरो में 500 से अधिक वैज्ञानिकों को सम्बोधित करते हुए सरकोजी ने कहा, "यह काफी आश्र्चयजनक है कि एक अरब से भी ज्यादा की जनसंख्या वाले देश को सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता हासिल नहीं है।"
सरकोजी ने कहा कि ब्राजील, जर्मनी, जापान और अरब देशों को भी सुरक्षा परिषद में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
भारत के परमाणु अलगाव की समाप्ति की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि फ्रांस भारत में और परमाणु संयंत्र स्थापित करेगा। उन्होंने कहा, "भारत और फ्रांस के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।"
भारत में आतंकवादी खतरे के बारे में सरकोजी ने कहा, "आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में फ्रांस सदैव भारत का साथ देगा। भारत पर होने वाला हमला लोकतंत्र पर हमला माना जाएगा।"
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान और अफगानिस्तान में फैल रहा आतंकवाद विश्व शांति और स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा है।" सरकोजी ने यह भी कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की आवाज को गम्भीरता से सुना जाएगा।
सरकोजी ने दोनों देशों के छात्रों और युवाओं के बीच आपसी सहयोग को बढ़ाने की बात भी कही।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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