झारखंड पंचायत चुनाव : नक्सल समर्थित 3,000 निर्विरोध जीते
पंचायत चुनाव के इन नतीजों से नक्सलियों के दोयम व्यवहार का पता चलता है। एक ओर वे चुनाव का बहिष्कार कर रहे हैं तो दूसरी ओर अपने रिश्तेदारों को ही चुनाव में खड़ा कर रहे हैं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि नक्सली अपने समर्थन वाले उम्मीदवारों के विरोधियों को उम्मीदवारी वापस लेने के लिए दबाव बना रहे हैं, ताकि उनके रिश्तेदार या मित्र चुनाव जीत सकें।
नक्सलियों के समर्थन वाले उम्मीदवारों में से एक मंजू देवी का उदाहरण लिया जा सकता है। वह नक्सलियों के स्वयंभू क्षेत्रीय कमांडर कुलदीप गंजू की पत्नी हैं और पलामू जिले के हुर्नाली से मुखिया का चुनाव लड़ रही हैं।
उधर, चतरा के लावलोंग प्रखण्ड में ममता देवी, नीलम देवी हेडुम, रामकली देवी जैसी कुछ उम्मीदवार निर्विरोध मुखिया चुनी गई हैं। ये सभी नक्सलियों की पत्नी हैं।
इस चलन से राजनीतिक दलों को भी कोई आपत्ति नहीं है। भारता जनता पार्टी (भाजपा) के एक नेता रमेश पुष्कर ने आईएएनएस से कहा कि पंचायत चुनाव का मकसद जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करना है। यह अच्छी बात है यदि नक्सली लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ रहे हैं।
बिहार से सन् 2000 में अलग होने के बाद झारखंड में पहली बार हो रहा यह पंचायत चुनाव 27 नवंबर से शुरू हुआ है। इससे पहले यहां 1979 में चुनाव हुआ था। तब झारखंड बिहार का हिस्सा था। अधिसूचित जनजातीय क्षेत्र में जनजातीयों को आरक्षण मुद्दे पर चल रही कानूनी लड़ाई के कारण यहां पंचायत चुनाव रुका हुआ था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications